दूसरों की सेवा करना सबसे बड़ा धर्म है
Service to others is the greatest religion
कॅरोना महा मारी की एक मार्मिक कथा और एक सेल्यूट
श्रुति अभी १० दिनों से घर नहीं जा सकी थी, काम कुछ ज्यादा ही था ,महामारी कॅरोना की वजह से , अस्पताल भी सरकार ने लेलिए थे, बहुत सोचा था क्या करूँ , कैसे अपने परिवार और राष्ट्र के प्रति दायित्व और परिवार में सामंजस्य कैसे स्थापित करूँ ?एक बार तो मन में आया दो छोटे बच्चों, बूढी माँ और पति, इन सबके दायित्व में बाधा आएगी, फिर दूसरी ओर डॉक्टरी की डिग्री मिलते समय का एक पूरा दृश्य उसके सामने घूम गया , कुलपति ने हॉल में कहा, श्रुति आपने हमारे वि.वि. में सबसे ज्यादा अंक प्राप्त करके वि.वि.का सम्मान बढ़ाया है ,आज तक किसी विद्यार्थी को इतने अंक नहीं मिलपाये है ,पूरे हांल में बड़ी भारी तालियों कीआवाज गूंज गई, फिर कुलपति की दूसरी आवाज आई अब श्रुति आपके सामने अपने अनुभव बताएंगी और मैंने बोलना चालू किया "मुझे आज भी याद है पहले दिन की वो प्रतिज्ञा जिसमें मैंने कहा था मै प्रतिज्ञा करती हूँ कि --मानव कल्याण के लिए मै अपनी पूरीशक्ति पीड़ित मानवता के हित में लगाउंगी ,मन वचन कर्म से भेदभाव नहीं रखूंगी, और अनेक प्रतिज्ञाएं की थी मैंने, कई रात सो नहीं पाई थी मै जब मैं उन प्रतिज्ञाओं का सामना विचारों मर करती थी | मानव धर्म और उसकी सेवा हरेक के वश का विषय नहीं है ,बहुत कम लोगो को ईश्वर यह मौका देता है ,आज मुझे ईश्वर ने इसके लिए चुना ,इसका मुझे गर्व है ---न जाने क्या क्या आदर्शों की बातें की मैंने, बस केवक तालियां ही बजती रही | ,फिर मन कड़ा करके यहीं सोचा कि यही अवसर है खुद को सिद्ध करने का तो यह मार्ग तय भी कर लिया ,पति रवि ने इस सहयोग देकर एक नै ऊर्जा दे दी थी मुझे |
६ साल का यश रवि को पकडे बैठा था और बाइक पर आगे ३ साल की रूही आगे बैठी थी तय यही हुआ था मम्मी नहीं आई बहुत दिनों से ,घरमें माँ बोली मत छूने देना उसे , लेकिन दिखा तो ला ,रवि ने यश और रूही से अनुबंध किया रोओगी तो नहीं ,समय को देख कर दोनो ने एक आज्ञाकारी की तरह सर हिलाया नहीं, चाहते न चाहते सुबह का इन्तजार किया, सुबह ८ बजते बजते दोनो बच्चे तैयार कर दिए गए ,बड़ी भारी तैयारी थी ,लाल रिबन के साथ नयी फ्रॉक ,यश ने नया नेकर सुंदर शर्ट पहनी ,पिता ने माँ से कहा चलो मिलवा कर लाता हूँ, इनकी माँ से इनको, अस्पताल के बाहर से फ़ोन किया सड़क के इस पार खड़े होकर इन्तजार किया ,अचानक श्रुति दिखी अस्पताल के गेट से निकलती हुई, अपनी दो सहेलियों के साथ ,अपना माक्स हटाते हुए जोर से आवाज दी थी माँ ने मेरी मुन्नी, मेरा भैय्या राजा बेटा ,रूही अचानक बिफर गई थी जिद कररही थी गोद में लो माँ ,दोनों बच्चे जोर जोर से रो रहे थे ,श्रुति भी रोने लगी थी ,और सहेलियां सब की आँखे भीग गई थी, िशारश्रुति ने इशारा किया ले जाओ बच्चों को ,सारा किया कराया बेकार हो गया था ,रवि को लगा गलत ले आया मिलवाने , दोनो बच्चे जोर जोर से रो रहे थे बच्चे बुला रहे थे माँ आजा एक बार और अस्पताल के अंदर से एक मूक पुकार फिर उठ रही थी कहां हो डॉक्टर ----
बड़ी भारी विडम्बना है जीवन जिसमे स्वयं को सिद्ध करने के लिए कभी कभी ऐसी परीक्षाएं देनीं होती है जहाँ मन के सारे भाव आपस में प्रतिद्वंदी हो जाते है, सही और गलत के बड़े फेर में आप अनिर्णय की स्थिति में पहुँच जाते है और सयम के सारे नियम आचार विचार सब फीके लगने लगते है --
मन का या विचार फिर खड़ा हुआ कि इस बड़े महा सग्राम में सब अपना अपना योग दान दे रहे है ,एक समाज का जिम्मेदार नागरिक होने की भूमिका में क्या कर रहा हूँ, क्या आज के समय मैं अपनी भूमिका से संतुष्ट हूँ ,-----प्रश्न के उत्तर में केवल यह लगा कि ,समाज के लिए मैं , उतनी प्रभावी भूमिका अदा नहीं कर पा रहा जितना स्वयं को करना चाहिए था |
आज जब सम्पूर्ण विश्व कॅरोना की चपेट में में है और तमाम विकसित देश औंधे मुँह पड़े है, हजारो की संख्या में लोग हताहत हुए है ,जबकि उनके संसाधन हमारी अपेक्षा कई गुने समृद्ध है ,परन्तु वे आज की स्थिति में अपने कॅरोना पीड़ितों को न तो दवा दे पा रहे है ,और न ही वे सुविधाएँ जो आज की तारिख में उनके लिए आवश्यक है ,ऐसे समय में हमारे जैसे अर्ध विकसित देश के नागरिको का एक सूत्र में बंधे रहकर राष्ट्र धर्म का करना ही हमे उन विकसित देशों से श्रेष्ठ सिद्ध कर सकता है, जीवन का प्रत्येक समय अपने क्रियान्वयन के लिए एक अनुशासन की मांग अवश्य करता है ,क्योकि उस अनुशासन के बगैर जीत संभव हो ही नहीं सकती, अतः उन मानदंडों के पालनार्थ हमे एक नयी सयोजना खड़ी करनी ही होगी |
भारत का नागरिक जिन कारणों से महान है वह अलग अध्यात्म का विषय है और उसी कारण सम्पूर्ण विश्व में उसकी एक अलग पहिचान भी है ----अपरिग्रह वह सब चीजों का प्रयोग छोड़ने की क्षमता रखता है ,----शारीरिक नियंत्रण वह स्वयं के प्रति सचेत है, (शरीर माध्यम खलु धर्म साधनम )वह अपनी एकाग्रता से स्वयं को स्वस्थ्य बनाये रखने में सक्षम है, ----अपना अनुशासन बना कर अमल करने वाला माना जाता है ----कम से कम भौतिक संसाधनों में आपूर्ति करने वाला, -----वह ईश्वर वादी है बहुत विश्वास है उसे अपनी धर्म पद्धति पर, -----वह दुनियां की सभी पैथी से इलाज करना जानता है घरेलु,यूनानी,होम्योपैथी,आयुर्वेदिक ,हवन चिकित्सा, योग ,एरोमा ,मन्त्र चिकित्सा ,यन्त्र , पर्यावरण ,सौर ,चुंबक ,और स्थानीय स्तर पर जल अग्नि वायु शुन्य चिकत्सा के अलग तरीके है ------आत्मा की अमरता शरीर की नश्वरता का ज्ञान उसे है इस लिए निर्भय है वह
आज विश्व के सभी नागरिको से केवल यह प्रार्थना है कि वे अपनी दिन चर्या में इन्हें शामिल करें यह प्रार्थना कॅरोना की दवा का दवा नहीं है वरन बचाव एक स्वस्थ जीवन चर्या का भाग अवश्य है, जिससे कई रोगो से मुक्ति की सम्भावना अवश्य है---
Service to others is the greatest religion
कॅरोना महा मारी की एक मार्मिक कथा और एक सेल्यूट
श्रुति अभी १० दिनों से घर नहीं जा सकी थी, काम कुछ ज्यादा ही था ,महामारी कॅरोना की वजह से , अस्पताल भी सरकार ने लेलिए थे, बहुत सोचा था क्या करूँ , कैसे अपने परिवार और राष्ट्र के प्रति दायित्व और परिवार में सामंजस्य कैसे स्थापित करूँ ?एक बार तो मन में आया दो छोटे बच्चों, बूढी माँ और पति, इन सबके दायित्व में बाधा आएगी, फिर दूसरी ओर डॉक्टरी की डिग्री मिलते समय का एक पूरा दृश्य उसके सामने घूम गया , कुलपति ने हॉल में कहा, श्रुति आपने हमारे वि.वि. में सबसे ज्यादा अंक प्राप्त करके वि.वि.का सम्मान बढ़ाया है ,आज तक किसी विद्यार्थी को इतने अंक नहीं मिलपाये है ,पूरे हांल में बड़ी भारी तालियों कीआवाज गूंज गई, फिर कुलपति की दूसरी आवाज आई अब श्रुति आपके सामने अपने अनुभव बताएंगी और मैंने बोलना चालू किया "मुझे आज भी याद है पहले दिन की वो प्रतिज्ञा जिसमें मैंने कहा था मै प्रतिज्ञा करती हूँ कि --मानव कल्याण के लिए मै अपनी पूरीशक्ति पीड़ित मानवता के हित में लगाउंगी ,मन वचन कर्म से भेदभाव नहीं रखूंगी, और अनेक प्रतिज्ञाएं की थी मैंने, कई रात सो नहीं पाई थी मै जब मैं उन प्रतिज्ञाओं का सामना विचारों मर करती थी | मानव धर्म और उसकी सेवा हरेक के वश का विषय नहीं है ,बहुत कम लोगो को ईश्वर यह मौका देता है ,आज मुझे ईश्वर ने इसके लिए चुना ,इसका मुझे गर्व है ---न जाने क्या क्या आदर्शों की बातें की मैंने, बस केवक तालियां ही बजती रही | ,फिर मन कड़ा करके यहीं सोचा कि यही अवसर है खुद को सिद्ध करने का तो यह मार्ग तय भी कर लिया ,पति रवि ने इस सहयोग देकर एक नै ऊर्जा दे दी थी मुझे |
६ साल का यश रवि को पकडे बैठा था और बाइक पर आगे ३ साल की रूही आगे बैठी थी तय यही हुआ था मम्मी नहीं आई बहुत दिनों से ,घरमें माँ बोली मत छूने देना उसे , लेकिन दिखा तो ला ,रवि ने यश और रूही से अनुबंध किया रोओगी तो नहीं ,समय को देख कर दोनो ने एक आज्ञाकारी की तरह सर हिलाया नहीं, चाहते न चाहते सुबह का इन्तजार किया, सुबह ८ बजते बजते दोनो बच्चे तैयार कर दिए गए ,बड़ी भारी तैयारी थी ,लाल रिबन के साथ नयी फ्रॉक ,यश ने नया नेकर सुंदर शर्ट पहनी ,पिता ने माँ से कहा चलो मिलवा कर लाता हूँ, इनकी माँ से इनको, अस्पताल के बाहर से फ़ोन किया सड़क के इस पार खड़े होकर इन्तजार किया ,अचानक श्रुति दिखी अस्पताल के गेट से निकलती हुई, अपनी दो सहेलियों के साथ ,अपना माक्स हटाते हुए जोर से आवाज दी थी माँ ने मेरी मुन्नी, मेरा भैय्या राजा बेटा ,रूही अचानक बिफर गई थी जिद कररही थी गोद में लो माँ ,दोनों बच्चे जोर जोर से रो रहे थे ,श्रुति भी रोने लगी थी ,और सहेलियां सब की आँखे भीग गई थी, िशारश्रुति ने इशारा किया ले जाओ बच्चों को ,सारा किया कराया बेकार हो गया था ,रवि को लगा गलत ले आया मिलवाने , दोनो बच्चे जोर जोर से रो रहे थे बच्चे बुला रहे थे माँ आजा एक बार और अस्पताल के अंदर से एक मूक पुकार फिर उठ रही थी कहां हो डॉक्टर ----
बड़ी भारी विडम्बना है जीवन जिसमे स्वयं को सिद्ध करने के लिए कभी कभी ऐसी परीक्षाएं देनीं होती है जहाँ मन के सारे भाव आपस में प्रतिद्वंदी हो जाते है, सही और गलत के बड़े फेर में आप अनिर्णय की स्थिति में पहुँच जाते है और सयम के सारे नियम आचार विचार सब फीके लगने लगते है --
मन का या विचार फिर खड़ा हुआ कि इस बड़े महा सग्राम में सब अपना अपना योग दान दे रहे है ,एक समाज का जिम्मेदार नागरिक होने की भूमिका में क्या कर रहा हूँ, क्या आज के समय मैं अपनी भूमिका से संतुष्ट हूँ ,-----प्रश्न के उत्तर में केवल यह लगा कि ,समाज के लिए मैं , उतनी प्रभावी भूमिका अदा नहीं कर पा रहा जितना स्वयं को करना चाहिए था |
आज जब सम्पूर्ण विश्व कॅरोना की चपेट में में है और तमाम विकसित देश औंधे मुँह पड़े है, हजारो की संख्या में लोग हताहत हुए है ,जबकि उनके संसाधन हमारी अपेक्षा कई गुने समृद्ध है ,परन्तु वे आज की स्थिति में अपने कॅरोना पीड़ितों को न तो दवा दे पा रहे है ,और न ही वे सुविधाएँ जो आज की तारिख में उनके लिए आवश्यक है ,ऐसे समय में हमारे जैसे अर्ध विकसित देश के नागरिको का एक सूत्र में बंधे रहकर राष्ट्र धर्म का करना ही हमे उन विकसित देशों से श्रेष्ठ सिद्ध कर सकता है, जीवन का प्रत्येक समय अपने क्रियान्वयन के लिए एक अनुशासन की मांग अवश्य करता है ,क्योकि उस अनुशासन के बगैर जीत संभव हो ही नहीं सकती, अतः उन मानदंडों के पालनार्थ हमे एक नयी सयोजना खड़ी करनी ही होगी |
भारत का नागरिक जिन कारणों से महान है वह अलग अध्यात्म का विषय है और उसी कारण सम्पूर्ण विश्व में उसकी एक अलग पहिचान भी है ----अपरिग्रह वह सब चीजों का प्रयोग छोड़ने की क्षमता रखता है ,----शारीरिक नियंत्रण वह स्वयं के प्रति सचेत है, (शरीर माध्यम खलु धर्म साधनम )वह अपनी एकाग्रता से स्वयं को स्वस्थ्य बनाये रखने में सक्षम है, ----अपना अनुशासन बना कर अमल करने वाला माना जाता है ----कम से कम भौतिक संसाधनों में आपूर्ति करने वाला, -----वह ईश्वर वादी है बहुत विश्वास है उसे अपनी धर्म पद्धति पर, -----वह दुनियां की सभी पैथी से इलाज करना जानता है घरेलु,यूनानी,होम्योपैथी,आयुर्वेदिक ,हवन चिकित्सा, योग ,एरोमा ,मन्त्र चिकित्सा ,यन्त्र , पर्यावरण ,सौर ,चुंबक ,और स्थानीय स्तर पर जल अग्नि वायु शुन्य चिकत्सा के अलग तरीके है ------आत्मा की अमरता शरीर की नश्वरता का ज्ञान उसे है इस लिए निर्भय है वह
आज विश्व के सभी नागरिको से केवल यह प्रार्थना है कि वे अपनी दिन चर्या में इन्हें शामिल करें यह प्रार्थना कॅरोना की दवा का दवा नहीं है वरन बचाव एक स्वस्थ जीवन चर्या का भाग अवश्य है, जिससे कई रोगो से मुक्ति की सम्भावना अवश्य है---
- शासन की घोषणा अनुरूप घर में ही रह कर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करें , संसाधनों की कमी को स्वीकारते हुए कम में जीवन यापन का आनंद लेने की कोशिश कीजिये |
- सर्व प्रथम राष्ट्र धर्म का पालन पहली प्राथमिकता है ,जिसमे राष्ट्र द्वारा की गई घोषणाओं पालन और का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए |
- एक जिम्मेदार नागरिक की तरह हर बीमार के बारे में या संदिग्ध व्यक्ति की सूचना शासन को दें इससे समाज में बीमारी का फैलाव नहीं होगा |
- खाने में शाकाहारी भोजन , शहद नीबू धनिया लॉन्ग इलाइची ,इमली और गर्म मसाले का प्रयोग करे
- खाने में विरोधाभासी भोजन न करें, जैसे दूध के साथ मूली बैगन रात्रि में दही नीबू का सेवन और ठन्डीचीजों का सेवन तथा फ्रीज्ड वस्तुओं का ;सेवन न किया जाए
- पानी के कूलर का प्रयोग न किया जाए ए सी बहार के तपन के हिसाब से १-२ डिग्री कम करके रखा जा सकता है ,नहीं तो इसे भी प्रयोग न करें
- ग्रीन टी चाय कोफी गर्म पेय और सूप लिए जा सकते है मगर किसी भी सूरत में रात में कोल्ड कॉफी कोल्ड ड्रिंक आइस्क्रीम के प्रयोग से बचे
- अपने आपको ऐसे वातावरण में रखें जिसमे सामाजिक दूरी के साथ लोगों के संपर्क में कम से कम आया जाये |
- अति आवश्यक कार्य से संपर्क में आना ही हो तो दस्ताने चश्मा माक्स आदि का प्रयोग करे या साफी आदि नाक और मुँह को कवर करके बांधें |
- नित्य की पूजा से पूर्व या सुबह योग और व्यायाम अवश्य करें ,इससे स्वांस गति और अनेक रोगों पर विजय प्राप्त की जा सकती है |
- गर्म पेय में दालचीनी तुलसी लॉन्ग अदरक कालीमिर्च गुड़ को उबाल कर थोड़ी मात्रा में दो बार लिया जा सकता है |
- हवन का हमारे सनातन धर्म में अपना अलग महत्व है पीपल गूलर खैर आम छोला लकडियां हवन के लिए उपयुक्त मानी जाती है हवन सामिग्री में २००ग्राम कालातिल १०० ग्राम चावल ५० ग्राम जौ इस अनुपात का वर्णन वेदोक्त है ,घी अपनी सुविधा अनुरूप डालें |
- हवन के अतिरिक्त घर में धूप देने के लिए , गाय के कंडे के टुकड़े को जला कर उसपर गूगल लोबान लाख कपूर नारियल बताशा लोंग और घी डालकर उसके धुंए को हर जगह घुमा सकते है इससे कई तरह की सकारात्मकता आती है |
- प्रति दिन अपने धर्म के हिसाब से प्रार्थना अवश्य करें और ईश्वर से सबकी उन्नति की कामना भी करें ,जो भी धर्म हो ,वो अनेक शक्तियों का केंद्र होता है ,सभी धर्मों में प्रार्थना शब्द विन्यास एवं एक अलौकिक शक्ति का प्रादुर्भाव अवश्य होता है इसे नाद ब्रह्म माना जाता है |
- समय की विपरीतता को मात्र उपाय यही है कि हर पल स्वयं को सकारात्मक बनाये रखिये धीरज और भविष्य स्वप्नों के प्रति आशान्वित बने रहियें |
3 comments:
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धन्यवाद जीवन में वो कर सके जो समाज मानवता के लिए वरदान हो
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