Thursday, August 6, 2009

मिलावट,भ्रष्टाचार को कडा कानून चाहिए

भारतीय परिवेश में हम सब बड़ी बड़ी बातें करते है ,बार बार यह जताने की कोशिश करते है कि हम मूल्यों औरसंस्कार में सबसे उन्नत सभ्यता रखते है मगर बड़े दुःख और क्षोभ का विषय है कि खाद्यपदार्थों ,आधारभूतनिर्माणों और दवा व्यवसाय,दूध, घी ,और हर विकास के तथा जीवनके लिए आवश्यक पदार्थों में मिलावट का नयादौर सा आरम्भ दिख रहा है ,बच्चे जन्म से पूर्व कोख में ही अपंग हो रहें है उन्हें पैदा होते ही तमाम बीमारियाँ घेररहीं है ,दवा केनाम पर विष परोसा जा रहा है ,और हर आदमी कमोवेश बीमार लाचार और अपंग होता जारहा है|


आधार भूत निर्माण कार्यों में ऐसा निर्माण किया जारहा है जिसका स्वयं का आधार झूठ फरेब असत्य और मुनाफा कमाने का साधन बन गया है |पुल ,और निर्माण कार्य बनते बनते ही ध्वस्त हो रहें है ,वेही सड़कें बार बार बनाई जारहीं है जिन्हें हम पूर्व में बना चुके है ,बांधों के निर्माण आवश्यकता के अनुरूप नहीं अपितु नेता के चुनाव क्षेत्रों से जुड़े है ,और सर्वांगीण विकास आज भी आदिवासियों की तरह भूखा ही खड़ा है |और हम विकास को सांख्यिकी आकडों के भंवर में सबसे श्रेष्ठ बताने कि कवायद में लगे है|

भ्रष्टाचार और मिलावट दौनोही ऐसे ही
अपराध है जिन्हें क्षम्य करना देश समाज और नागरिकों के लिए बहुत बड़ा अन्याय है |मुग़ल साशन काल में ऐसे अपराधो की सजा सजा ऐ मौत तय की जाती थी |मगर जबसे हम अधिक विकसित और ज्ञानी बने है हमारी व्यावस्था ने हर आदमी को बेईमान साबित कर दिया है क्योकि हम में सच बोलने और स्वीकार करने का सहस ही नहीं जुटा पाते है |

भ्रष्टाचार के लिए एक ऐसा क़ानून हो जो बिना समय गवांये उसकी दंडात्मक कार्यवाही कर सके १ आदमीके कत्ल पर जो अदालतें आदमी को आजीवन कैद की सजाए दे देती है वे पूरे समाज और राष्ट्र के नागरिकों के ह्त्या के षड्यंत्र में शामिल किसी अपराधी को बरी कैसे करसकती है |भ्रष्टाचार और मिलावट के बारे में सरकार को एक बार फिर पुनर्विचार कर नीति का निर्माण करना होगा नहीं तो कल उनके घरों में भी उस अभिशप्त मौत का तांडव होगाजिसके लिए कमोवेश वे भी बराबर के जिम्मेदार थे |

मित्रों इस सम्बन्ध में निम्न तथ्य महत्वपूर्ण हो सकते है

  • राष्ट्र की सर्वोच्चजाँच एजेंसी द्वारा भ्रष्टा चार और मिलावट की जाच की जाए |
  • पुरानी जांच एजेंसियों के पुरातन तरीके बदले जाए एवं नयी शोध पद्धतिया और तरीके खोजे जाए जिसकाप्रशिक्षण जनता में भी बांटा जाए|
  • भ्रष्टाचार एवं मिलावट और स्तरहीन कार्यके सिद्ध होने पर यह मालूम किया जाए कि यह कार्य कबसे चलरहा है एवं कौन कौन से अधिकारी इस क्षेत्र के जिम्मेवार थे इन सब पर भी अपराधिक मुक़दमे चालाये जाएकहने का आशय यह कि अधिकारियों कि जबाब दारी तय कि जाए |
  • इस बात की सूचना आम की जाए की कौन कौन से नेता,समाजके प्रतिष्ठित लोग ऐसे अपराधियों को बचानेकी कोशिश करते है इन्हे जनता के बीच अवश्य ले जाए |
  • भ्रष्टाचार और मिलावट केलिए विधान अवं लोक सभा सदस्यों ने अपने क्षेत्र में क्या उपाय किए कितने लोगोंको सजा के लिए क़ानून के हवाले किया यह जानकारी समय समय पर एकत्रित की जाए |
  • भ्रष्टाचार अवं मिलावट के लिए सजा मौत और आजीवन कैद जैसी सजाये जल्दी तय की जाए |
  • कारखानों के साथ बाजारों और दुकानों के रखे समान पर भी छापे डाले जाए और दुकान मालिकों एवम उनअधिकारियों पर भी कठोर कार्यवाही की जावे जो इस क्षेत्र के लिए जिम्मेदार थे |
  • सबसे पहले सरकार और जनता को यह तय करना होगा कि वे इस महा अपराध के लिए क्या चाहते है यदिवास्तव में वे स्वस्थ्य और तंदुरस्त समाज कि कल्पना करते है तो उन्हें इस हेतु कठोर दंड का प्रावधानकरना चाहिए |
  • जन जागरण अभियान के लिए जनता को सजग रहना होगा ऐसी घटना कि समय रहते जानकारी सरकारकन्द्रीय सरकार और अधिकारियों को दे | ,
  • न्याय पालिका को भारत का अस्तित्व बचाने के लिए ऐसे अपराधो को देश द्रोह और सार्वजनिक हत्या केषडयंत्र कीतरह कठोर सजा के लिए विधान में संशोधन कि पहल करनी चाहिए |
  • सर्वोच्च न्याय पालिका ईश्वर के बाद सबसे सशक्त न्याय का मध्यम है ऐसे में उससे यह प्रार्थना कि जासकती है कि यदि आज इस भ्रष्टाचार और मिलावट तथा स्तरहीन निर्माणों को गंभीर अपराध कि श्रेणी मेंनहीं रखागया तो सम्पूर्ण भारतीय भविष्य कि नींवे आधार हीन और निर्बल रह जायेंगी |अतः इसके लिएआवश्यक संगठन ,एवम नए कठोर क़ानून की आवश्यकता को पूरा किया जाए |
  • केन्द्र ,राज्य ,जिला तहसील क़स्बा नगर ,और उनके भागों के आधिकारियों को भी न्याय के क्षेत्र में नजदीकरखकर उन्हें जिम्मेदार बनाया जाए ,आवश्यकता होने पर उनके विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जाए |

यह
कुछ बिन्दु भ्रष्टाचार निवारण के लिए अधिक सार्थक पहल करसकते है |


Tuesday, August 4, 2009

व्यवहार सफलता का आईना है ,परिष्कृत करें

आदमी के जीवन में व्यवहार का विशेष महत्व होता है |जन्म से ही उसके माता पिता यह प्रयास करते है की वहएक विद्वान ,शिक्षित और विशेष दर्जे पर खड़ा होकर जीवन की सम्पूर्ण सफलताएं प्राप्त करे |उसके व्यवहार परसबसे अधिक प्रभाव जिस वातावरण का पड़ता है वह परिवार और उसके आसपास कमोवेश विद्यमान रहता हैसाथ ही थोड़ा बड़ा होने पर उसके स्कूल शिक्षकों और अपने मित्रों से भी वह कुछ अंश तक प्रभावित होता है |इसकेसाथ ही वह महापुरषों ,अपनी सोच और जो कुछ उसके पास घट रहा है ,उससे भी प्रभावित हुए बगैर नहीं रह पाता|नई शिक्षा पद्धति ,विश्वके ज्ञान और तकनीकी परिवर्तन भी उसके व्यवहार को प्रभावित करते रहते है |और वह इन सबके निचोड़ को अपने जीवन की उपलब्धताओं से जोड़ कर अपना व्यवहार निर्मित कर पाता है |उसके मष्तिष्क में दुनिया में सर्वश्रेष्ठ साबित करने की ललक भी हमेशा बनी रहती है |उसके व्यवहार से ही आगामी पीढ़ियों का भवष्य बंधा होता है वह यह जानता है कि वह व्यवहार में यदि सफल साबित हुआ तो उसकी आगामी पीढ़ियों को सफलता अवश्य मिल जायेंगी |क्योकि उसकी सफलता और कारणों के साथ व्यवहार के पक्ष अधिकजुड़े हुए है |

आदमी का व्यवहार एक एसा दर्पण है जिसको देखकर,परख कर या अपने चिंतन के साथ रख कर उसके तमाम भविष्य,वर्त्तमान और अतीत का अनुभव सहज ही किया जा सकता है |उसकी जीवन शैली उसका विकास औरउसकी वैचारिकता का सहज अनुमान इस व्यवहारिक पक्ष से लगाया जा सकता है |उसकी क्रिया शीलता,उसका जीवन के प्रति दृष्टिकोण, उसके व्यवहार से ही परिलक्षित होता रहता|हम यह कह सकते है की जीवन के हर सशक्त पहलू का प्रत्यक्ष आईना यह व्यवहार ही होता है |जब जीवन की छोटी से छोटी बड़ी से बड़ी उपलब्धियां इस व्यवहार पर ही निर्भर है तो आवश्यक यह है कि व्यवहार के इस पक्ष को अधिक महत्व प्रदान किया जाए |

मित्रों व्यवहार एक ऐसा विषय है जिसकी संवेदन शीलता बहुत अधिक है ,क्रोध ,अपनत्व ,घृणा ,द्वेष ,विराग ,प्रेमये सब इसका ही रूप है जीवन के प्रति सकारात्मक और ऋणात्मक सोच भी आपके व्यवहार को प्रभावित करतीहै,आपके लिए लिए अपने हर क्रियान्वयन और सोच पर गहरी चिंतन शीलता की आवश्यकता है व्यवहार के लिएआप अपना मूल्यांकन अवश्य करें |

  • दूसरों के प्रति अपना दृष्टी कोण सकारात्मक रखें जिससे आप में सकारात्मक ऊर्जा काप्रभाव बढेगा ऋणात्मक व्यक्तित्व के लोगों को धीरे धीरे अपनी सोच से दूर रखने का प्रयत्न करें चाहे वे कितने भी नजदीकी रिश्तों मेंक्यों हों |
  • सबसे मीठा बोलिए और कई बार आपको जो उचित लगे ,उसका सहज और सरलता से विरोध करें ध्यानदेने वाली बात यह है कि यहाँ भी आप अपना संयम बनाए रखें |
  • अपने मूल्य और आदर्श स्थापित करें और कोशिश हो उसका पालन हो |
  • आवश्यक होने पर ही बात करें ,दूसरों को ध्यान से सुनियें ,शायद वह अपना प्रश्न और उत्तर आपको दौनों हीबता रहा है उसमे आप अपना समय और शक्ति ख़त्म नहीं करें |
  • आपके चलने बैठने उठने ,बात करने के लहजे से केवल श्रेष्ठता और विनम्रता झलकनी चाहिए क्योकि येबिन्दु भी आपके व्यावहार को अधिक सशक्त बनाते है |
  • क्रोध ,घृणा ,मन मुटाव की स्थिति में नकारात्मक व्यवहार करें क्योकि ये आपके सयंम सब्र औरविनम्रता की परिक्षा है |
  • दूसरे को यथा सम्भव प्रोत्साहन देने का प्रयत्न करें ,क्योकि इस व्यवहार से आपका कर्म,कार्य शैली तथासीखने की भावना अधिक प्रबल और विकसित होगी |
  • अपने आपको कृत्रिम रूप से ,आवरण में रखकर ,और श्रेष्ठ होते हुए भी श्रेष्ठ साबित करने की कोशिश करें क्योकि इससे आपकी आत्मा बल ,और विकास पथ केसकारात्मक पहलू अधिक क्षतिगृस्त होंगे, येआपके लिए बड़ी बाधा बन जाएगा |
  • जीवन में भविष्य के प्रति सकारात्मक सोच बनाए रखें क्योकि यही आपको भविष्य की सुरक्षा देगा |
  • आलोचना से बचें ,झूठ फरेब और लालच से आप थोडा लाभ अवश्य कमा सकते है, मगर दीर्घ काल में ये हीआपके लिए अधिक ऋणात्मक पक्ष साबित होगा |
इसके अतिरिक्त बहुत से ऐसे पहलू हो सकते है जो आपको अधिक परिष्कृत करके सफल साबित करें आप अपनेमें सामायिक, परिस्थितिगत औरतकनीक परिवर्तन के साथ , सीखने की भावनाए जगाये रखिये आप एक दिन अपने आपको सफल ,श्रेष्ठ औरपूर्ण अवश्य साबित कर पायेंगे |

Monday, August 3, 2009

मेरी तन्हाई

रात भर तन्हाई में गाता रहा
ग़म कॉ आलम याद फ़िर आता रहा

हर गया लमहा तुम्हारी याद बन
बे वज़ह इस दिल को तडफाता रहा

कश्तियों के डूबने कॉ शोर सा
मेरे साहिल पर सदा आता रहा

आशियानों में लगी थी आग क्यों
सोच कर ता उम्र घबराता रहा

दर्द का एहसास राही क्या बला
उम्र भर पत्थर से टकराता रहा

Sunday, August 2, 2009

कन्फ्यूज़न ,हताशा ,करियर ,आपके प्रश्न |

मेशा से आदमी की यह चाहत रही है कि वह अपने बच्चों को एक ऐसी राह दे जहाँ से जीवन का पथ अधिकसुरक्षित और सुगम बनजाये |इसके लिए उसे बहुत से प्रयत्न करने पड़ते है ,बाल्य काल से ही अपनी आपूर्तियाँबच्चों से करने की उसकी कल्पनाएँ दूध मुहें बच्चों से यह सुनकर तृप्त होती रहती है कि उसे डॉक्टरइंजीनियर,कलेक्टर औरकिसी बड़े ओहदे का इंसान बनाना है |यहाँ हमारी सभी अतृप्त कामनाएं अधिक प्रबलदिखाई देती है और बच्चा इसमे अपना खेल और प्रोत्साहन ढूढ़ लेता है |परिवार की कल्पनाओं में पलता बच्चाइसी माहोल में अपना भविष्य देखने लगता है |

स्कूल में भरती बच्चे पर उसके साथियों ,परिवेश और उसके गुरुजनों द्वारा सम्मानित समाज के तमाम लोगउसकी प्रेरणा का श्रौत बनने लगते है और वह कोशिश करने लगता है कि वह भी उन्ही कि तरह सफल होकर सबजगह सराहा जाए |उसकी तुलना का यह भी विषय होता है कि वह जिन दोस्तों जिस माहोल और जिस परिवेश सेजुड़ा होता है,उससे संपन्न और अधिक श्रेष्ठ व्यक्तियों कि तरह वह भी परिपूर्ण होना चाहता है |उसके मन मेंअंतर्द्वंद चलता रहता है कि मै अधिक संपन्न और श्रेष्ठ क्यों नहीं हूँ |वह दिवा स्वप्नों में स्वयं को सर्वाधिक संपन्नऔर योग्य मानने लगता है |

थोडा बड़ा होने पर उसे ज्ञात होने लगता है कि पिता ने जो सहज प्रश्न पर मेरे कलेक्टर डॉक्टर और इंजिनियर बनने की जो कल्पनासोची थी उसके लिए वह काफी कठिन विषय थी|उसका अन्त: अपने आप से लड़ने लगता है कि वहकहाँ अपनी सफलता ढूढे |उसे मार्ग दर्शन देने वाला कोई दिखाई नहीं देता ,उसके अपने यह बताने लगते है कि मैअमुक कोर्से कर रहा हूँ आपभी वो करलें,क्योकिं उन्हें अपने साथ के लिए कोई चाहिए था |हम देखा देखी सब कुछकरना चाहते है ,यह समझे बगैर कि यह अध्ययन हमारी जरूरत है कि नहीं क्योकि हमें कोई समझा नही पा रहाथा ,जो समझते थे वे हमारे अपने नहीं थे और हम केवल अस्थिर कन्फ्यूज और दूसरे की सीख पर बिना सोचेसमझे चल पड़ते है शायद इसमे ही अपना हित हो परन्तु धीरे धीरे यह स्पष्ट होने लगता है की हमने अपना मार्गअपनी कल्पनाओं से विपरीत चुन लिया है ,और यह भी हमारी हताशा का एक बहुत बड़ा कारण हो जाता है |

यहाँ युवा की भी अपनी सोच पैदा होने लगती है वह अपने मित्रों और परिवेश की नक़ल करने लगता है उसकेस्टेटस सिम्बाल में आधुनिकता आने लगती है वह बाह्य चमक धमक से अपना व्यक्तित्व निखारने की कोशिशकरने लगता है मगर थोड़े दिन बाद यह मालूम होने लगता है की समाज दोस्त और उसके अपनों के लिए वह केवलएक सिद्ध करने की वस्तु बन कर रह गया है ,उसके तात्कालिक निर्णयों ने उसे बहुत क्षति पहुंचाई है |इस समयतक उसके जीवन कॉ बड़ा भाग वह बीता हुआ मानने लगता है और यह भी उसकी हताशा कॉ कारण बन जाता है |

, आपको जरूरत है निम्न सूत्रों की|



  • मित्रों सब आनादी काल से इसे ही चलता रहा है और चलता भी रहेगा उसपर दुःख मानाने और शोक करने कीजरूरत नहीं है क्योकि जब आप किसी के फरेब दुःख और इर्ष्या कॉ शिकार होते हो तो आपमें क्रोध और बदले कीकामानायं प्रचंड रूप में विद्यमान होती है आपको इसी क्रोध और प्रचंडता को दिशा देकर अपने आप को सिद्ध करनेकी जरूरत है बस एक बार संकल्प करें |
  • जीवन के लिए अपनी राह ख़ुद बनाए ,जब आप अपनी राह बना कर बड़े उद्देश्य के लिए चलेंगे तो समाज फ्रंड्सऔरआपके अपने ही उस प्रयत्न में रुकावट ,लालच ,तात्कालिक उपलब्धियों का जाल बनेगे मगर आपको यह सोचकरआगे जाना है की यह आपको बाद में देखना है
  • आप अधिक से अधिक लोगों के संपर्क से अपनी समस्यायें सुलझाने कॉ प्रयत्न करे ध्यान रहे कि इस प्रयासमें आपको गुमराह ,हतोत्साहित और निराशा देने वाले ९० प्रतिशत से ज्यादा ही मिलेंगे मगर यह खोजउनसे पूरी होगी जो आपको सही मार्ग देने के लिए उत्साहित है |विशवास रखें कि आपका पथ प्रदर्शकआपको अवश्य मिलेगा|
  • किसी भी समय भी धनात्मक सोच से अपना मार्ग बनाना और उसपर अमल करना देर नहीं हो सकती आपआज यदि अपना नियत उद्देश्य बना कर यदि चल दिए है तो मंजिल की मजबूरी है कि वह आपकोअवश्यमिलेगी ही
  • जो आपसे अपने किए उपकारों कॉ प्रतिफल मांग रहा है या जिसकी अप्रत्यक्ष इच्छा आपसे कुछ हासिलकरने की है वह तो आपका अपना होही नहीं सकता |
  • आपको अपने कर्तव्य और दायित्वों को सर्वोपरी रखना है मगर आपका मूल उद्देश्य सबसे पहले होना चाहिए
  • आपका स्वप्न बहुत बड़ा होना चाहिए क्योकि यदि आपने उद्देश्य ही छोटा बना लिया तो जीवन भी आपकोकेवल अतृप्तता में खडा कर देगा |
  • माता पिता गुरु आपका शरीर और आपकी आत्मा केवल आप इसके लिए उत्तरदायित्व वहां करें शेष के साथवैसा ही व्यवहार करें जैसा वे आपको देते है ,मगर आपके लड़ने के ढंग परिष्कृत और धनात्मक हों |
  • आप समय का स्पष्ट और समय सारिणी के हिसाब से उपयाग सीखें जिससे आपको बोरियत नहीं होगी औरकार्य स्वयं आपसे रचनात्मक शुरुआत करवा देगा |
  • उन लोगों कॉ चिंतन बिल्कुल करे जो आपकी उन्नति में बाधक बने ,आप धनात्मक व्यक्तियों कि खोजकरें एवं महा पुरुषों को अपना आदर्श मानें |
  • सबसे समान और प्रेम कॉ व्यवहार रखें मगर सीमाओं के ध्यान के साथ |इससे आपको दूसरों का चिंतननहीं करना पडेगा |
  • उद्देश्य ,वचन और आत्मा की सच्ची आवाज ने यदि आपको विकास की राह पर जीवन के किसी भी पलकार्य करने के लिए निर्णय लिया तो वह आपको सफलता अवश्य देगा |
उपरोक्त बिन्दुओं के अतिरिक्त समय परिस्थितियों और अवसर के अनुसार आपको कड़े और सही निर्णय लेनेचाहिए यहाँ यह महत्व पूर्ण है की यदि आप जीवन के किसी भी पल धनात्मक सोच बनाते है तो ईश्वर स्वयं उसेपूरा करने की परिस्थितियां खादी कर देगा आपकाकेवल कठिन परिश्रम उद्देश्य की पवित्रता ,और निष्काम भावचाहिए यही आपकी जीवन की सफलताएँ होंगी |

हताशा ,निराशा ,और अवसाद यह बताते है कि आप ईश्वर पर कम विश्वास रखते है जब पूर्ण निष्ठां से आप अपनाकर्तव्य कर चुकें तो ईश्वर कॉ काम यही रह जाता है कि वह आपको आपकी सोच से कहीं उपर एक ऐसे स्थान परप्रतिस्थापित करे जिससे आदमी धनात्मक चिंतन को इतिहास कॉ विषय बना कर उसका अनुशरण कर सके यहउस ईश्वर के लिए भी बहुत आवश्यक विषय है |

प्रश्न और समस्याओं के समाधान में यदि मै कुछ मार्ग दर्शन दे पाया तो धन्य समझूंगा |

Saturday, August 1, 2009

शान्ति और संतोष केलिए शक्ति और संघर्ष जरूरी है|

हम जीवन के हर पहलू पर शान्ति और संतोष की कामना करते है मगर यह भूल जाते है कि यह सब केवल उसेनसीब है जो स्वयं अपने क्रियान्वयन से इसे पैदा करने कि क्षमता रखता है |

सुरक्षा और शान्ति के लिए हमें ताकतवर और शक्ति संपन्न होना चाहिए हमारी सीमाए
और राष्ट्र तब तक ही सुरक्षित है जब तक हम ताकतवर और मजबूत है|

यह
विचार यह बताता है कि यदि हम जीवन में शान्ति सुख और संतोष की कामना करते है तो उसके लिए हममे नैतिक ,चारित्रिक और कर्तव्य निष्ठां का बल होना आवश्यक है | इसी प्रकार जीवन के पुनरुत्थान के लिए हमेअनेक प्रकार के गुणों की आवश्यकता होती है जिनके बिना जीवन को वह शान्ति कभी नही मिल सकती जिसेआदमी के लिए उत्तम कहा गया है |

मनुष्य जीवन में भी पशुओं के सदृश्य गुण विद्धमान होते है उसमे अपने स्वार्थों और प्राप्तियों के लिए ललक हमेशाबनी रहती है |वह हर अप्राप्त को प्राप्त करने की चेष्टा करता है जबकि जो उसके पास था उसपर वह आधिपत्यजमाये रखना चाहता है |वह समाज की हर सुंदर और बेजोड़ वस्तु का स्वामी होना चाहता है ,वह कालजयी होनाचाहता है ,वह समय,बदलाव और ज्ञान के क्षेत्र में अतुलनीय और विजयी होना चाहता है |उसकी अनंत काल सेयही आशा रही है की वह संसार में सबसे श्रेष्ठ और बेजोड़ बना रहे |वह समाज ,परिवार,और आदर्शों के उच्चतमशिखर पर ही रहना चाहता है ,उसे मालूम रहता है कि यदि वह किसी भी बिन्दु पर कमजोर हुआ तो उसका प्रतिद्वंदीसमाज या लोग उसे कुचल कर निकल जायेंगे |कहने का अभिप्रायः यह कि वह अपनी आत्मा की शान्ति औरसंतोष के लिए मजबूत और अतुलनीय बना रहता है यही उसकी शान्ति भी होती है |

मित्रों संतोष शान्ति एवं सुख तो बल संघर्ष और ताक़त के प्रतीक माने गए है ,और इस संसार में कोई भी चीजमाँगने और गिड़ गिडाने से नहीं मिलती उसके लिए कठिन संघर्ष करना होता है |हम अपने मूल्य ,आदर्श औरजीवन की हर उपलब्धि के लिए संघरशील होते है और उसमे जीत भी हासिल करते है मगर जब जीवन के किसीपहलू पर संघर्ष का नाम सुनते है तो घबराते जरूर है ,जबकि हम उससे भी विपरीत परिस्थितियों में सफलताहासिल कर चुके होते है ऐसे में यह कितना उचित है कि हम इन समस्याओं के सामने अपने को बौना साबितकरदें|

शान्ति की संजीविनी मिल जाएगी, जिंदगी की जंग में जीते अगर





अनंत कामनाएँ,जीवन और सिद्धि

  अनंत कामनाएँ,जीवन और सिद्धि  सत्यव्रत के राज्य की सर्वत्र शांति और सौहार्द और ख़ुशहाली थी बस एक ही  कमी थी कि संतान नहीं होना उसके लिए ब...