Saturday, April 18, 2020

ब्रह्माण्ड का आधार मै हूँ I am the basis of the universe (रामायण से पूर्व गीता उपदेश )

ब्रह्माण्ड का आधार मै हूँ  
I am the basis of the universe
(रामायण से पूर्व गीता उपदेश )
महानारायण अर्थात ब्रह्माण्ड का नियंता बहुत ज्यादा व्यस्त थे एक बहुत बड़ी कलाकृति बना रहे थे ,सारे ब्रह्माण्ड की सुंदरता ,शक्ति ,सोच, पांडित्य और श्रद्धा ,साधना ,कर्म, योग स्थिरता ,वैभव ,विद्वता और असंख्य  गुण  डाल दिए थे अपनी कृति में ,फिर उसको शक्तियां देना आरम्भ की अस्त्र ,शस्त्र , दिव्य और अजेय  मारण , संहारक और दुर्लभ शक्तियों से उसे सजाया गया ,मन की ओजस्विता इतनी कि अपने मन की गति से भ्रमण , पृथ्वी आकाश पाताल  और सारे ,दृश्य अदृश्य घटनाओं का सहज ज्ञान डाला दिया गया ,टूटने फूटने का डर सबको है, नारायण ने अपने पुतले को सिद्ध किया शस्त्र , अस्त्र  ,  तीर ,भाला ,नुकीली कटीली और पृथ्वी पर उत्पन्न कोई चीज तुझे काट नहीं सकती , तू गिर के नहीं टूट सकता ,दुनिया की कोई शक्ति तुझे नुकसान नहीं पहुंचा सकती ,तू अजेय ही रहेगा , और जो चाहेगा वो करने में सामर्थ्य वान  बनेगा ,दुनिया का कोई व्यक्ति और जीव तेरा अंत नहीं कर सकता, क्योकि तेरा निर्माण मैंने किया है और तुझे दुनिया का सबसे शक्तिशाली और सुंदर कृति बनाया है , न आज तक ऐसा पुतला बना है न बनेगा | 

पुतले के निर्माण की प्रक्रिया पूरी हो गई थी ,सब और से निरीक्षण करने के बाद ,सब तरफ से संतुष्ट होकर, उस महानारायण ने उस पुतले में प्राण संचार किया ,जीवित किया और उसमे आत्म तत्त्व का निर्माण भी कर दिया, अचानक पुतला एक विशालकाय योद्धा के रूप में महानारायण के सामने हाथ जोड़ कर खड़ा होगया, उसे चारो और से देखने के बाद महा नारायण ने उसे आवाज दी, महा गर्जन सी ,दृष्टी दी एक महा सम्मोहन सी ,गति दी हजारो अश्वों की चाल सी , भुजाओं का बल सहत्रों हाथियों के बल से कहीं ऊपर था ,और ध्यान दिया उस मनु भागीरथी और  ब्रह्मा सा, कि  वह आपने ध्यान से ही इष्ट को समक्ष पैदा करदे ,उसके छै चक्र स्तंभित और उसके वश में थे ,वह अपने सह्त्रसार में जीवंत सजीव और गति मान था , मन्त्र ,तंत्र ,और विषम यंत्रों का जानने वाला मारण ,मोहन ,वशीकरण ,उच्चाटन कीलन और उद्वासन इन महा षट विद्या तंत्र, का जानकार था नारायणका यह पुतला ,कहने का आशय यह कि  अपार शक्ति ज्ञान और पूर्णता के साथ ,सजीव निर्माण था यह महा नारायण का | 

पूर्ण निर्माण के बाद, बड़ी प्रेम भरी नजरों से देख कर ,पुतले ने महानारायण की स्तुति आरम्भ की ,हे काल पुरुष आप अलग अलग नामों से , अलग अलग युग में पैदा होते रहे और संसार का उद्भव पालन और नाश के कारण भी रहे है ,आप ही आदि है आप ही अंत है , आप ही दुःख है ,आप ही सुख है ,जड़ -चेतन ,अच्छा- बुरा शक्ति- सम्पन्नता  व शक्ति हीनता ,सब आप में ही निहित है ,आप ही हाथी जैसे बड़े जीव में है ,और आप ही चीटीं से लाखों गुना छोटे अदृश्य जीव में निहित है, हे नाथ संसार में जो दृश्य अदृश्य है वो सब आपमें ही निहित है ,आपको बारम्बार प्रणाम ,हे महाबाहो प्रलय काल में आप क्रुद्ध होकर संहारक हुए ,तो कभी पालन करने में माता बनकर सबको पोषण दे रहे थे, ,और आपके द्वारा ही अनंत जगत पैदा होता हुआ दिख रहा था , अनंत ब्रह्माण्ड में अनेक काल मुखों से विलुप्त होते हुए संसार को मैंने देखा है ,तो आपके  अनगिनत हिरण्य गर्भों से पैदा होते हुए संसार भी देखे है यह कहकर पुतला महानारायण के चरणों में साष्ट्रंग प्रणाम करते हुए लेट गया | 

महानारायण ने बड़े वात्सल्य से उसे उठाया और पूछा पुत्र तेरा मन अशांत क्यों है , निसंकोच होकर अपने मन की बात पूछो -- पुतले ने कहा हे दीनों पर दया करने वाले ,मै कौन हूँ ,मेरा नाम क्या है ,मै  किस काम से पैदा हुआ हूँ  और स्वयं को ही नहीं जानता ,इस लिए बड़ा व्याकुल हूँ ,महानारायण ने गंभीर होकर कहा ,पुत्र तेरा नाम रावण है, श्रेष्ठ ऋषिकुल में पैदा होते हुए भी तू  महाराक्षस सा संसार में अवतरित होगा ,तेरा कार्य सम्पूर्ण राक्षस कुल को एकत्रित कर उनपर शासन करना होगा ,दुनियां के सारे राक्षस कुल का तू एकमात्र सम्राट होगा , देवता दानव , किन्नर, नाग और संसार का हर शक्तिशाली तेरे सामने निस्तेज हो जाएगा और तेरा एक क्षत्र  राज्य होगा ,वह भी निष्कटक ,बहुत देर अपनी गुण गाथा सुनी पुतले ने फिर उदास होकर कहा कि ,स्वामी मेरा यह जन्म केवल अपयश के लिए, ख़राब काम करने के लिए या धर्म विरुद्ध कर्म के लिए जाना जाएगा और जिससे मुझे मुक्ति नहीं मिलेगी कभी , दया कीजिये --- महानारायण बोले पुत्र जब भी ब्रम्हांड में कोई संकट आता है ,तो मुझे ही अवतार लेना होता है , तेरी मुक्ति के लिए भी मुझे स्वयं अवतार लेना होगा ,फिर तेरे कुल समेत सम्पूर्ण राक्षस जाति  का अंत करके ,तुझको मुझमे ही समाना होगा क्योकि मै ही इस सृष्टि कस निर्माणक हूँ, पुत्र इसी तरह हर जीव चर -अचर गोचर - अगोचर में मै  ही उसकी उत्पत्ति पालन और नाश का कारण भी हूँ ,कभी तुझको कंस और मुझे कृष्ण बनाना होता है ,कभी राम मै  बनता हूँ तो रावण तुझे बना कर भेजना होता है और संसार में हर जीव को अपने अनुसार अपना धर्म निबाहना होता है, यह कहकर महानारायण अंतर्ध्यान हो गए ,और पुलस्त्य कुल मेंएक नवजात शिशु की आवाज गूंजने लगी ---

 कर्म ही सबसे  महान विषय है जो आपका भविष्य निर्धारित करता है ,  जिन विषय स्थितियों में आपका वश नहीं है उसमे अपने आपको फँसाए ,बिना वजह के चिंता करके आप वर्तमान को निस्तेज क्यों बना रहे है ,आप में अपरमित शक्ति पराक्रम और अनंत ज्योति है ,जिससे आपको अपने अन्तः को प्रकाशित करना है , आप हमेशा अतीत और भविष्य की सोच से वर्तमान को जोड़े रहे, परिणाम न आपके पास अतीत आपया और ना ही भविष्य वरन इस नकारात्मक सोच के लिए आपको जो मूल्य चुकाना पड़ा ,वो सबसे ज्याद मूल्यवान और महत्वपूर्ण था ,आपने अपना वर्तमान ही दांव पर लगा दिया, जिसकी भरपाई हो ही नहीं सकती ,आवश्यकता इस बात की थी कि हम अपनी कार्य शैली को  इतना परिष्कृत  करें कि कल हमे इसके प्रतिउत्तर में पश्चाताप में न खड़ा हो ना  पड़े | 

 निम्नांकित पर विचार अवश्य करे 
  • ईश्वर एक है उसके सारे रूपों में कोई भेद नहीं है, यदि आप अपने धर्म को सर्वोपरि मानकर दूसरे के धर्मों की अवहेलना करते  अभी ईश्वर  आपसे काफी दूर है | 
  •  अतीत भविष्य के लिए परेशांन  होने से आप वर्तमान की गतिशीलता और उसकी सकारात्मकता को खो रहे है जबकि वर्तमान भविष्य का निर्णायक है | 
  • संसार में स्वयं को जानना और उसकी आदर्श रूप रेखा के साथ कार्य करना ही सबसे बड़ा  धर्म है , आप अपने धर्म के अनुसार कार्य करें | 
  • जीवन आपको बार बार मौके नहीं देता ,किसी गलत कार्य को अपनी गलती मानते हुए ही ख़त्म कर देना तथा प्रायश्चित और गलती स्वीकार कर लेना ही सबसे बड़ा धर्म है | 
  • व्यक्ति की सोच और समझ की एक सीमा होती है और वह अपने से जुड़े निर्णय न्याय संगत ढंग से नहीं कर पाता  अतः उसे विद्वान और बड़ों की सलाह माननी चाहिए | 
  • सचिव , डाक्टर , और गुरु आपके डर से प्रिय  लगने वाली बातें ही बोलने लगे तो राज्य ,धर्म ,और शरीर का विनाश कोई नहीं बचा सकता | 
  • समय पर किसी का अधिकार नहीं है , इस लिए जितना जल्दी अच्छा काम कर सकते है कर लीजिये ,क्योकि समय कल दुबारा आपको मौका दे न दे, इसमें संशय है | 
  • अन्याय अनाचार और नकारात्मकता का फल भी नकारांमक ऊर्जा का सृजन करेगा ,अतः हर कार्य से पूर्व उसकी सकारात्मकता पर विचार करना अधिक आवश्यक है | 
  • स्त्री का निरादर   करना ,बहुत बड़ा अपराध है , जहाँ तक संभव हो उसके सम्मान  के विषय में विचार करते रहिये | 
  • राज्य ,धन वैभव और बल की अधिकता के कारण अहंकार उत्पन्न होता है और यही से दूसरों का अपमान का भाव पैदा होने लगता है जो विनाश की महा जड़ माना गया है |

Thursday, April 16, 2020

कर्म और सोच ही निर्धारित करती है जीवन को Karma and thinking determine your life

कर्म और सोच ही निर्धारित करती है जीवन को

Karma and thinking determine your life
(दुष्कर्मों और आलोचनाओं से बचें)
वीर का जन्म बड़ी मन्नतों के बाद हुआ था राज  परिवार में बड़े जश्न मनाये गए थे ,बन्दूकें चली ,सारे आस पास के गाँव में भंडारे खिलाए गए ,पूजा का प्रशाद गया बाँटा गया और जीवन चलने लगा , संयुक्त परिवार की मान्यताओं में बढ़ते हुए परिवार थे, वीर की तीन ताई और तीन ताऊ थे ,और उनके छै भाई और चार बहिने , वीर की भी परवरिश इसी माहौल में होने लगी थी, चार साल के वीर को माँ यही समझा समझा के रखती थी ,उनके घर नहीं जाना, ये ताऊ बेकार है ,वो वाले ताऊ बेमान है, फिर यह समझाती , हमारी तो शादी बहुत बड़े ख़ानदान में होरही थी ,तुम्हारे बाबा नाक रगड़ने पहुँच गए ,इस घर में ज़िंदगी ख़राब हो गई मेरी,तमाम झूठ सच इसी तरह की बातों में बढा पलाथा वीर| 

समय बीतता गया स्कूल कॉलेज में ज्यादा सफलता मिलनी ही नहीं थी, सो नहीं मिली ,वीर किसी की भी सुन नहीं सकता था ,कॉलेज में रिवाल्वर लटकाकर जाना ,एक  गुट बना कर नकल करना, फिर थर्ड डिवीजन से पास होना फिर शराब का जश्न हवाई फायर इस तरह बी ए पास होगया था ,हमारा अपना वीर ,जरा जरा सी बात में गंदी गालियां देना और हर बात पर अपने दृष्टी कोण को थोपना काम था हमारे वीर का ,कही से भी कोई क्लेश का बिंदु छूट नहीं सकता था उससे  ,दिन भर किसी न किसी बात पर उलझते रहना और हर २-४ दिन बाद उसकी लड़ाई थाने 
  जाना बड़ा निश्चित था | 

जिन राजनैतिक पार्टियों में वो लड़ाई झगडे और वर्चस्व की लड़ाई के लिए जाता था, वहां पर ही उसके मत भेद खड़े होने लगते थे जो एक पुराने लीडर थे ,उनसे पैसों के लेन दैन  को लेकर मतभेदहो जाता था परिणाम यह था कि दूसरे राजनैतिज्ञ वीर का उपयोग करने में पीछे नहीं थे ,एक दिन अनायास खबर आयी की पुराने वाले नेताजी किसी सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए है  ,सम्बन्ध जो भी हो वीर के परिवार से बहुत निकट सम्बन्ध थे ,नेताजी का बड़ा प्रभाव था ,उनका अपने क्षेत्र में, लाखों लोगो की भीड़ थी ,बड़ा भव्य रथ के साथ अंतिम संस्कार हुआ ,वीर परिवार के साथ सबसे आगे था , नेताजी के परिवार को उसने उतनी सहायता दी थी  ,जितनी सहायता नेता जी अपने परिवार को कभी नहीं दे पाए थे, छोटे लड़के के बिज़नेस को ५० लाख लगा कर नए मुकाम पर खड़ा कर दिया ,बड़े पुत्र को बड़े कृषि जमीन को हाउसिंग के प्लान  में परिवर्तित कर लिया गया और नेताजी की पत्नी भी उसके उपकार को देखते हुए उसे अपना तीसरा पुत्र मानने लगी थी |चुनाव का समय था ,नेताजी की सीट पर नेताजी का बड़ा पुत्र और पत्नी ने उस सीट पर वीर को उतारने की सहमति दे दी थी ,पार्टी नेताओं को  इस निर्णय पर राजी भी कर लिया गया था ,नेताजी की बड़ी फोटो के साथ चुनाव में वीर खड़ा हो चुका था बड़े बड़े नेता आकर उसे भविष्य का श्रेष्ठ नेता मान चुके थे ,क्योकि उन्हें पालूम था उसके पास सारे तरह के बल काम करते है ,चुनाव का परिणाम वीर के पक्ष में ही आया और फिर बड़े जश्न मनाये जाने लगे ,


राजनैतिज्ञों  की कतार में वीर का अच्छा नाम माना जाता था ,उसकी पत्नी बच्चे उसकी अत्याधिक महत्वांकांक्षा के कारण उससे अलग होगये थे ,और उसके जीवन की केवल एक प्यास रह गई थी , यश यश और केवल पैसा यश और जो अच्छा लगे वो उसका हो |  बढ़ता हुआ समय और मन की अस्थिरता ने वीर को एक दम अशांत कर दिया था ,जो भी सम्बन्ध वो ताकत और धन बल से पैदा कर लेता था ,वे भी बड़ी भारी अस्थिरता ही देकर जाते थे ,काम के बदले रिश्ते धन, वैभव संपत्ति,ले देकर भी कोई शांति प्राप्त नहीं कर पाता , शरीर शुगर ,हाई बी पी और अनेक बीमारियों का केंद्र बन चुका था ,खाना, पीना, रहना ,सोना सब एक अज्ञात भय के साये में था ,कि कारण क्या है,यह भी समझ से परे है , कभी कभी अतीत की घटनाएं बहुत परेशां करती थी ,जो किसी को बताई भी  नहीं जा सकती थी | 

कई बार एम्स जैसे बड़े अस्पताल में दिखा दिया ,लेकिन आज तक कोई बीमारी नहीं पकड़ पाया, दिन ब दिन शरीर ख़त्म होता जा रहा था |इसी बीच सुना की कोई बहुत बड़े साधू हिमालय से आये है ,वीर ने अपने पी ए को कहा मिलना बहुत जरुरी है,एकांत में बाबा वीर से बोले बेटा ,तेरा कर्म चक्र तुझे सताने पर आगया है, तू अपने जीवन की सारी  भूल मेरे सामने बता कर प्रायश्चित कर , बाबा की आवाज में एक भारी सम्मोहन था ,वीर एक कठ पुतली की तरह बोलता गया महाराज दो हत्याएं हो गई है ,लेकिन मालूम किसी को नहीं है ,बाबा बोले  नहीं बेटा १५ वर्ष की उम्र में एक दोस्त को जिसे ज्यादा पीटा था ,वो भी मर गया था ३ हत्याएं की है तूने ,फिर तो पूरी कहानी तोते की तरह बताता चला गया था वीर ,साधु बोले  बेटा तुमने जिन नेता जी को मरवाया है वो तो पुत्र जैसा मानते थे तुमको।,आज तुमपर अफरात दौलत है ,शोहरत है, मगर तुम पागलपन के उस स्तर पर पहुँच चुके हो ,जहाँ किसी चीज से तुम्हे शांति नहीं मिल पा रही ,घर वाले पत्नी और रिश्तों को तूने तुच्छ समझ कर एक पेशेवर व्यक्ति की तरह व्यवहार किया ,आज तेरे लिए वो सब भावनात्मक सम्बन्ध न रह कर पेशेवर सम्बन्ध हो गए है, तू उनको लूटना चाहता है वो तुझे लूटना चाहते है | फिर शांति कहाँ से लाएगा , तेरी सारी नकारात्मकता का आरम्भ जो तूने अपनी माँ ,पिता परिवार और समाज से पाया है , उसका फल तुझे ही भुगतना पड़ेगा और  उसके लिए तुझे अपनी स्वीकारोक्ति पैदा करनी ही होगी ,यदि तू जीवन का पश्चाताप ही करना चाहता है तो, जीवन सेकैसे भी जीतने की इच्छा और राजनैतिक दांव पेच सब निकाल दे ,और अपनी गलतियों के पश्चताप हेतु स्वयं को झूठ फरेब लाभ हानि से दूर कर , अपने किये के लिए अपनी सजा और अच्छे कामों का निर्धारण कर ,शायद वो ईश्वर तेरी सजा कुछ कम कर दे जिससे तुझे थोड़ी शांति मिलपाये | 
आखिर कौन दोषी था उसके जीवन का --- वीर के सामने माँ का बात बात में झूठ बोलने के लिए प्रेरित करना ,पिता का निरीह पक्षियों का शिकार करना, दूसरे की तकलीफ में सुख मिलना ,खान पान रहन सहन और पूरे समाज में जो खुद को अच्छा न लगा उसके लिए मारपीट हत्या और साजिशों की एक पूरी  सूची उसके सामने घूम रही थी, लोग उसे धर्मात्मा कहते थे मगर उसकी आत्मा हमेशा दुत्कारती रही और जीवन बड़ी ग्लानि लिए खड़ी थी ,लगता था इससे तो मुझे फांसी हो जाए ,छूट तो जाऊँगा इस मन की तिरस्कार भरी सोच से ,करूँगा साधु महाराज ने जो प्रायश्चित कहा  है वो यही सोचते सोचते गहरी नींद में सो गया था वीर | 


दुनियां का सबसे बड़ा पाप था ,आलोचना करना और इसके प्रभाव असंख्य गुना प्रभावी होते है ,ध्यान रहे जब हम किसी की आलोचना करते है तो, उसकी नकारात्मकता ब्रह्माण्ड में घूमती हुई एक नियत शुन्य में जा कर टकराती है ,और उसकी नकारात्मकता से तीव्र सयोजन कर ,उस व्यक्ति तक लौटती है जिसकी आलोचना की है, फिर यह उस की जीवन तरंगों ओरा से प्रभावित होकर ,उसी व्यक्ति तक पहुँचती है जिससे ये नकारात्मकता निकली थी ,फिर इस व्यक्ति को नैराश्य ,अवसाद पागलपन ,मिर्गी,और मानसिक रोग होना स्वाभाविक है न ,यह केवल आलोचना का प्रभाव है , कर्म का प्रभाव इससे लाखों गुना तेज और सटीक है, उससे कोई नहीं बच नहीं सकता ,मगर एक मार्ग है जितना जल्दी स्वयं को सही रास्ते पर लाते हुए ,प्रायश्चित किया जाए और स्वयं को सत्मार्ग पर लगाने की चेष्टा करें इससे शायद जीवन की शान्ति , अर्थ और उसकी  उपलब्धि प्राप्त हो सके | 


अपनी जीवन शैली में निम्नांकित  का प्रयोग  व चिंतन अवश्य करें| 


  • बच्चो की शिक्षा में वर्तमान के काम चलाने की प्रक्रिया  से अधिक महत्व पूर्ण है उनके जीवन मूल्यों की रचना में सहयोग प्रदान किया जाए | 
  • व्यक्ति निर्माण के लिए सब पर दया एवं अहिंसा का भाव ,व्यक्ति का स्वाभाविक रूप है ,निर्दयता और  हिंसक स्वभाव से दूरी बनाये रखे | 
  • सत्य ,शान्ति और सदाचार व्यक्ति को जीवन के  अंतिम उद्देश्य देने में श्रेष्ठ माने  गये  है ,और यहाँ से ही स्वयं का विश्वास अपने प्रति प्रगाढ़ होता है | 
  • तुच्छ उपलब्धियों के लिए स्वयं के मूल्यों से समझौता न किया जाए, क्योकि ये मूल्य ही एक दिन आपको शान्ति सौहार्द और उन्नति के मार्ग पर लेजाने वाले है | 
  • हर किसी की आलोचना का अर्थ है कि , आपके अंदर बहुत सारी  नकारात्मकताएँ  अभी शेष है ,पहले स्वयं का निर्माण आवश्यक है | 
  • कर्म का फल आपको चाहते न चाहते मिलना ही है ,तो कर्म करने से पहले स्वयं को स्थिर करके अच्छे बुरे पर विचार करना आवश्यक है | 
  • सांसारिकता में डूबा हुआ श्रेष्ठ व्यक्ति जो सदाचार की परिभाषा जानता है ,वह जगल में बैठे हुए योगी से कई गुना श्रेष्ठ है, शायद उसे ही विदेह कहा जाना उचित है | 
  • दुनियां की सारी उपलब्धियां जो आपने अपने परिश्रम और सत्य व ईमानदारी के स्त्रोतों से अर्जित की है ,वे  आपको शान्ति और उपभोग का सुख देगी, कुमार्ग से कमाया हथियाया और लूट ,बेईमानी से अर्जित धन तुम्हारी पीढ़ियां नष्ट कर देगा| 
  • मृत्यु और ईश्वर के सन्मुख रहने का विचार आपको तमाम नकारात्मकताओं से बचा सकता है ,क्योकि आपके कर्म आपकी शक्ति के अहंकार के कारण ख़राब होते है | 
  • अहंकार शरीर, पद ,पैसे, संतान या भौतिक या आतंरिक शक्तियों का हो, वह यह बताता है की आपका अंत निकट है ,क्योकि जब आपको अपना गलत अनुमान होगा ,वही से आपका पराभव आरम्भ हो जाएगा |

Sunday, April 12, 2020

दूसरों की सेवा करना सबसे बड़ा धर्म है Service to others is the greatest religion कॅरोना महा मारी की एक मार्मिक कथा और एक सेल्यूट

दूसरों की सेवा करना सबसे बड़ा धर्म है
 Service to others  is the greatest religion
कॅरोना महा मारी की एक मार्मिक कथा और एक सेल्यूट  
 श्रुति अभी १० दिनों से घर  नहीं जा  सकी थी, काम कुछ ज्यादा ही था ,महामारी कॅरोना की  वजह से , अस्पताल भी सरकार ने  लेलिए थे, बहुत सोचा था क्या करूँ , कैसे अपने परिवार और राष्ट्र के प्रति दायित्व और परिवार में  सामंजस्य कैसे स्थापित करूँ ?एक बार तो मन में आया दो छोटे बच्चों, बूढी माँ और पति, इन सबके दायित्व में बाधा आएगी,  फिर दूसरी ओर  डॉक्टरी  की डिग्री मिलते समय का एक पूरा दृश्य उसके सामने घूम गया , कुलपति  ने   हॉल में कहा, श्रुति आपने हमारे वि.वि. में सबसे ज्यादा अंक प्राप्त करके वि.वि.का सम्मान बढ़ाया है ,आज तक किसी विद्यार्थी को इतने अंक नहीं मिलपाये है ,पूरे हांल में बड़ी भारी तालियों कीआवाज गूंज गई, फिर कुलपति की दूसरी आवाज आई अब श्रुति आपके सामने अपने अनुभव बताएंगी और मैंने बोलना चालू किया "मुझे आज भी याद है पहले दिन की वो प्रतिज्ञा जिसमें मैंने कहा था मै प्रतिज्ञा करती हूँ कि --मानव कल्याण के लिए मै अपनी पूरीशक्ति पीड़ित मानवता के  हित में लगाउंगी ,मन वचन  कर्म से भेदभाव नहीं रखूंगी, और अनेक प्रतिज्ञाएं की थी मैंने, कई रात सो नहीं पाई थी मै जब मैं उन प्रतिज्ञाओं का सामना  विचारों मर करती थी | मानव धर्म और उसकी सेवा हरेक के वश का विषय नहीं है ,बहुत कम  लोगो को ईश्वर यह मौका देता है ,आज मुझे ईश्वर ने इसके लिए चुना  ,इसका मुझे गर्व है ---न जाने क्या क्या आदर्शों की बातें की मैंने, बस केवक तालियां ही बजती रही | ,फिर मन कड़ा करके यहीं सोचा कि  यही अवसर है खुद को सिद्ध करने का तो यह मार्ग तय  भी कर लिया ,पति रवि ने इस  सहयोग देकर एक नै ऊर्जा दे दी थी मुझे |  

६ साल का यश रवि को पकडे बैठा था और बाइक पर आगे ३ साल की रूही आगे बैठी थी तय यही हुआ था मम्मी नहीं आई बहुत दिनों से ,घरमें माँ बोली मत छूने देना उसे , लेकिन दिखा तो ला ,रवि ने यश और रूही से अनुबंध किया रोओगी तो नहीं ,समय को देख कर दोनो ने एक आज्ञाकारी की तरह सर हिलाया नहीं, चाहते न चाहते सुबह का इन्तजार किया, सुबह ८ बजते बजते दोनो बच्चे तैयार कर दिए गए ,बड़ी भारी तैयारी थी ,लाल रिबन के साथ नयी फ्रॉक ,यश ने नया नेकर सुंदर शर्ट पहनी ,पिता ने माँ से कहा चलो मिलवा कर लाता हूँ, इनकी माँ से इनको, अस्पताल के बाहर से फ़ोन किया सड़क के इस पार खड़े होकर इन्तजार किया ,अचानक श्रुति  दिखी अस्पताल के गेट से निकलती हुई, अपनी दो सहेलियों के साथ ,अपना माक्स हटाते हुए जोर से आवाज दी थी माँ ने मेरी मुन्नी, मेरा भैय्या राजा बेटा ,रूही अचानक  बिफर गई थी जिद कररही थी गोद  में लो माँ ,दोनों बच्चे जोर जोर से रो रहे  थे ,श्रुति भी रोने लगी थी ,और सहेलियां सब की आँखे भीग गई थी, िशारश्रुति ने इशारा किया ले जाओ बच्चों को ,सारा किया कराया बेकार हो गया था ,रवि को लगा गलत ले आया मिलवाने , दोनो बच्चे जोर जोर से रो रहे थे बच्चे बुला रहे थे माँ आजा एक बार और अस्पताल के अंदर से एक मूक पुकार फिर उठ रही थी कहां हो डॉक्टर  ---- 

बड़ी भारी विडम्बना है जीवन जिसमे स्वयं को सिद्ध करने के लिए कभी कभी ऐसी परीक्षाएं देनीं होती है जहाँ  मन के सारे भाव आपस में प्रतिद्वंदी हो जाते है,  सही और गलत के बड़े फेर में आप अनिर्णय की स्थिति में पहुँच जाते है और सयम के सारे नियम आचार विचार सब फीके लगने लगते है --
मन का या विचार फिर खड़ा हुआ कि इस बड़े महा सग्राम में सब अपना अपना योग दान दे  रहे है ,एक समाज का जिम्मेदार नागरिक होने की भूमिका में क्या कर रहा  हूँ, क्या आज के समय मैं  अपनी भूमिका से संतुष्ट हूँ ,-----प्रश्न के उत्तर में केवल यह लगा कि ,समाज के लिए मैं , उतनी प्रभावी भूमिका अदा  नहीं कर पा रहा जितना स्वयं को करना चाहिए था | 


 आज जब सम्पूर्ण विश्व कॅरोना की चपेट में में है और तमाम विकसित देश औंधे मुँह पड़े है, हजारो की संख्या में लोग हताहत हुए है ,जबकि उनके संसाधन हमारी अपेक्षा कई गुने समृद्ध है ,परन्तु वे आज  की स्थिति में अपने कॅरोना पीड़ितों को न तो दवा दे पा रहे है ,और न ही वे सुविधाएँ जो आज की तारिख में उनके लिए आवश्यक है ,ऐसे समय में हमारे जैसे अर्ध विकसित देश के नागरिको का  एक सूत्र में बंधे रहकर राष्ट्र धर्म का  करना ही हमे उन विकसित देशों से श्रेष्ठ सिद्ध कर सकता है, जीवन का प्रत्येक समय अपने क्रियान्वयन के लिए एक अनुशासन की मांग अवश्य करता है ,क्योकि उस अनुशासन के बगैर जीत संभव हो ही नहीं सकती, अतः  उन मानदंडों के पालनार्थ हमे एक नयी सयोजना खड़ी करनी ही होगी | 

भारत का नागरिक  जिन कारणों से महान है वह अलग अध्यात्म का विषय है और उसी  कारण सम्पूर्ण विश्व में उसकी एक अलग पहिचान भी है ----अपरिग्रह वह सब चीजों का प्रयोग छोड़ने की क्षमता रखता है ,----शारीरिक नियंत्रण वह स्वयं के प्रति सचेत है, (शरीर माध्यम खलु धर्म साधनम )वह अपनी एकाग्रता से स्वयं को स्वस्थ्य बनाये रखने में सक्षम है, ----अपना अनुशासन बना कर अमल करने  वाला माना  जाता है ----कम से कम भौतिक संसाधनों में आपूर्ति करने वाला, -----वह ईश्वर वादी है बहुत विश्वास  है उसे अपनी धर्म पद्धति पर, -----वह दुनियां की सभी पैथी से इलाज करना जानता है घरेलु,यूनानी,होम्योपैथी,आयुर्वेदिक ,हवन चिकित्सा, योग ,एरोमा ,मन्त्र चिकित्सा ,यन्त्र , पर्यावरण ,सौर ,चुंबक ,और स्थानीय स्तर पर जल अग्नि वायु शुन्य चिकत्सा के अलग तरीके है ------आत्मा की अमरता शरीर की नश्वरता का ज्ञान उसे है इस लिए निर्भय है वह 


आज विश्व के सभी नागरिको से केवल यह प्रार्थना है कि वे अपनी दिन चर्या में इन्हें शामिल करें यह प्रार्थना कॅरोना की दवा का दवा नहीं है वरन बचाव एक स्वस्थ जीवन  चर्या का भाग अवश्य है, जिससे कई रोगो से मुक्ति की सम्भावना अवश्य है---
  • शासन की घोषणा अनुरूप  घर में ही रह कर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करें ,  संसाधनों की कमी को स्वीकारते हुए कम में जीवन यापन का आनंद लेने की कोशिश कीजिये |
  • सर्व प्रथम राष्ट्र धर्म का पालन पहली प्राथमिकता है ,जिसमे राष्ट्र द्वारा की गई घोषणाओं  पालन और  का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए | 
  • एक जिम्मेदार नागरिक की तरह हर बीमार के बारे में या संदिग्ध व्यक्ति की सूचना शासन को दें इससे समाज में बीमारी का फैलाव नहीं होगा |
  • खाने में शाकाहारी भोजन , शहद नीबू धनिया लॉन्ग इलाइची ,इमली और गर्म मसाले का प्रयोग करे 
  • खाने में विरोधाभासी भोजन न करें, जैसे  दूध के साथ मूली बैगन रात्रि में दही नीबू का सेवन और ठन्डीचीजों का सेवन तथा फ्रीज्ड वस्तुओं का  ;सेवन न किया जाए 
  • पानी के कूलर का प्रयोग न किया जाए ए सी बहार के तपन के हिसाब से १-२ डिग्री कम करके रखा जा सकता है ,नहीं तो इसे भी प्रयोग न करें 
  • ग्रीन टी चाय कोफी गर्म पेय  और सूप लिए जा सकते है मगर किसी भी सूरत  में रात में कोल्ड कॉफी कोल्ड ड्रिंक आइस्क्रीम के प्रयोग से बचे 
  •   अपने आपको ऐसे वातावरण में रखें जिसमे सामाजिक दूरी के साथ लोगों के संपर्क में कम से कम आया जाये | 
  • अति आवश्यक कार्य से संपर्क में आना ही हो तो दस्ताने चश्मा माक्स आदि का प्रयोग करे या साफी आदि नाक और मुँह को कवर करके बांधें | 
  •  नित्य की पूजा से पूर्व या सुबह योग और व्यायाम अवश्य करें ,इससे स्वांस गति और अनेक रोगों पर विजय प्राप्त की जा सकती है | 
  • गर्म पेय में दालचीनी तुलसी लॉन्ग अदरक कालीमिर्च गुड़ को उबाल कर थोड़ी मात्रा में दो बार लिया जा सकता है | 
  • हवन का हमारे सनातन धर्म में अपना अलग महत्व है पीपल गूलर खैर आम छोला लकडियां हवन के लिए उपयुक्त मानी जाती है हवन सामिग्री में २००ग्राम कालातिल १०० ग्राम चावल ५० ग्राम जौ इस अनुपात का वर्णन वेदोक्त है ,घी अपनी सुविधा अनुरूप डालें | 
  •  हवन के अतिरिक्त घर में धूप देने के लिए , गाय के कंडे के टुकड़े को जला कर उसपर  गूगल लोबान  लाख कपूर नारियल  बताशा लोंग और घी डालकर उसके धुंए को हर जगह घुमा सकते है इससे कई तरह की सकारात्मकता आती है | 
  • प्रति दिन अपने धर्म के हिसाब से प्रार्थना अवश्य करें और ईश्वर से सबकी उन्नति की कामना भी करें ,जो भी धर्म हो ,वो अनेक शक्तियों का केंद्र होता है ,सभी धर्मों में प्रार्थना शब्द विन्यास एवं एक अलौकिक शक्ति का प्रादुर्भाव अवश्य होता है इसे नाद ब्रह्म माना जाता है |  
  • समय की विपरीतता को  मात्र  उपाय यही है कि हर पल स्वयं को सकारात्मक बनाये रखिये धीरज और भविष्य  स्वप्नों के प्रति आशान्वित बने रहियें |


Wednesday, April 8, 2020

वैदिक ऋषियों का महामारी के सम्बन्ध में योगदान Contribution of Vedic sages about the epidemic (कॅरोना महामारी के सम्बन्ध में )

 वैदिक ऋषियों का महामारी के सम्बन्ध में योगदान
 Contribution of Vedic sages about the epidemic
  (कॅरोना महामारी के सम्बन्ध में )
  आज विश्व भयानक महा मारी की चपेट में खड़ा है  तथा कोई हल  दिखाई नहीं  दे रहा है कि  अपने राष्ट्रको इस महामारी से कैसे सुरक्षित करें ,आज विश्व के विकसित देशों में इसकी जिन दवाइयों का अंदाज लगाया जारहा है वो तक  उपलब्ध नहीं है,  हम शून्य  में खड़े  बचाव के मार्ग अपनाने की रण नीति बनाये खड़े है ,क्योकि इतिहास गवाह है, जब जब बड़ी महा मारी आयी सभ्यतायें नष्ट हो गई है, जो भाग कर कुछ एक लोग जान बचा पाए, वो ही आगे की पीढ़ी के लिए बच पाए है ,उस समय भी केवल एक इलाज था सब कुछ छोड़ कर जगल पहाड़ो नदी किनारे बस जाय ,जाए जहाँ संक्रमण का स्तर  कम हो जाए, और जाने अनजाने मौसम और खान पानी देशीदवाये जीवन शैली में प्रयोगित आचार व्यवहार से समय के साथ इस पर नियंत्रण पाया जाता था | 

 ईसा से पूर्व की शताब्दियों से महा मारी के इतिहास आज भी विकास को चिनौती दे रहे है ,जिनसे अरबो की संख्या में जान सख्या ख़त्म हुई है ,प्लेग एंथेक्स ,इन्फ्लून्जा तपेदिक चेचक हैजा आदि की   महा मारी प्रमुख थी जिसमे बड़ी जनसँख्या का भाग मारा गया ,ब्लैक डेथ १३०० में में अनेक हत्या का कारण बनी 
१५१८ से १५२० के बीच मेक्सिको व   यूरोपियन देशों  में भारी तबाही मचाई ये चेचक का प्रकोपित था ,१६१८-१९ में इससे ही भयानक तबाही इसी प्रकार आगे  की शताब्दियों में हैजा टी बी और यल्लो फेवर के नाम से जानी गई १८ १६ हैजा से १९६६ तक अरबो लोगो की मृत्यु का कारण बना इन्हे ७ बड़ी महामारियों में शामिल किया गया 
इसी प्रकार फ्ल्यू ,सन्निपात चेचक खसरा टी बीकुष्ठ मलेरिया और अज्ञात कारणों से भी महा मारी देखने को मिली जैसे इंग्लिश स्वेट का कारण आज तक मालूम नहीं हुआ है 


भारतीय सनातन परंपरा अखंड रही है अनंत काल से उसमे निरंतर परिवर्तन के साथ अनेक आविष्कार जुड़े है जबकि उसके मूल रूप ने तमाम विश्लेषण और शोध के बाद जोमूर्त स्वरुप पाया है वह साधना सिद्धि के बाद के सिद्धयोग माने जाते है वैदिक परम्पराओं में ऋग  वेद में कुल १० मंडलों में ११००० मंत्र निहित है यह पद्यात्मक प्रस्तुतिदेव आवाहन प्रार्थना जल ,वायु सूर्य मानस  और हवन चिकित्सा से सम्बंधित है ,१० वे मंडल में औषधि सूक्त में १२५ औषधियों का वर्णन जो १०७ स्थानों पर पाई जाती है ,यजुर्वेद गति शीलता का वेद है इसमें यज्ञ ,प्रयोग मन्त्र तत्व ज्ञान रहस्य ब्राह्मण आत्मा शरीर पदार्थ ज्ञान का अध्ययन अलग तरह से है , इसके बाद साम वेद में संगीत शास्त्र का सूर्य अग्नि इंद्र की आराधना प्रमुख है ,और अथर्ववेद रहस्यमयी विद्याओं जड़ी बूटी चमत्कार आयुर्वेद से जुड़ा शास्त्र है ५६८७ मन्त्रहै

 सामान्यतः धार्मिक ग्रंथों में महामारी के लिए प्राकृतिक  परिवर्तन कीट कृमि जो दृश्य अदृश्य स्वरुप में होते है उन्हें दोषी बताया गया है तथा युग युगांतर से यही क्रम रहा है कि ये महामारियाँ पर्याप्ततः  प्रकृति और जीवों को प्रभावित करती थी  वैसे तो

अथर्व वेद में जिन रहस्यमयी विद्याओं  के बारे में कहा गया है वो विधि व्यक्ति को नुक्सान पहुंचाने और पुष्टि कर्म के लिए भी उपयोगित की जाती रही है ,चमत्कार  के बारे में अनेक  प्रयोग किये  जाते  रहे  है ,इस महा ग्रंथ में जड़ी बूटी और आयुर्वेद का भी वर्णन  है , बीमारियों को  का सामर्थ्य रखती है ,इस  महा ग्रंथ में ऋग  वेद की तरह हवन विधियों का भी कहीं कही व्यवहारिक वर्णन मिलता है ,जलीय चिकित्सा , हवन चिकित्सा , औषधीय चिकित्सा ,मंत्राचिकित्सा , और सूर्य वायु अग्नि तथा मानस चिकित्सा का वर्णन मिलता है, जिनका उस सीमा तक प्रयोग किया जा सकता है ,जहाँ आप धर्मांध न हो , सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि आपको  के विकास और पुरातन  धरोहरों का कोई श्रेष्ठ सामंजस्य स्थापित करना है, जो मानवता की सेवा में अपना महत्व पूर्ण योगदान दे सके | 

 
अथर्व वेद महामारी के इस पूरे साम्राज्य को दृश्य और अदृश्य कृमि से मानता है ,और इनके नष्ट करने के उपाय भी उसमे निहित करता है यहाँ अलग अलग कृमियो के असंख्यों  प्रकार बताये गए है, जिनकी रचना और रंग  रूप स्पष्टतः वर्णित है
मन्त्र शक्ति के द्वारा ये कृमि को ख़त्म करने के संकल्प से पूर्व  स्वयं को पूर्ण  विश्वास रखना आवश्यक है ,इस विधान में सूर्य इंद्रा पृथ्वी कण्व ,अत्रि जमदग्नि अगस्त्य आदि ऋषियों के नाम से मन्त्र हवन  की आहुति कृमि विनाश में महत्वपूर्ण भूमिका रखती है |

संकल्प  शक्ति -- हम  अधिकांश कार्यों को संकल्प  शक्ति के द्वारा ही सिद्ध कर सकते है ,परन्तु सबसे  बड़ी  विडंबना यह  कि हमारा तमाम चिंतन इस बात पर अधिक महत्व  कि हम  नकारात्मकता कहाँ और कैसे है , हम जिसका ज्यादा चिंतन करेंगें वो चिंतन हमारे जीवन में घटने लगेगा ,शुक्ल यजुर्वेद में संकल्प को केवल संकल्प नहीं कहा गया, उसे शिव संकल्प कहा है जिसका अर्थ है सकारात्मक ,सबके लिए कल्याणकारी

नाद विज्ञान --- एक लय ताल और ब्रह्म वाक्यों का समूह ,जो  आवृति और नाद के कारण अलग अलग तरह के प्रभाव उत्पन्न करते हो कृमि नाशन के कार्य में निश्चित रूप से सामर्थ्यवान  है ,दुनियां के अनेक देशों की धर्म पद्धतियों में घंटा शंख  घड़ियाल  मंजीरे ढोल झांझ  प्रयोग पुरातन धर्म वेत्ताओं ने यही सोच समझ कर बनाये और प्रयोग किये थे

हवन शक्ति -- पांच तत्वों में अग्नि वायु सबसे सशक्त स्वरुप में पाए जाते है, इनमे गुण  यह  कि वे अपने पास कुछ नहीं रखते आपको ही वापिस करदेते है, वह सब जो आप  अर्पित कर देते है , कई  धर्मों में जहा सुगन्धित द्रव्य औषधियां घी और अलग अलग तरह की सामिग्री का प्रयोग कर ऋषियों देवताओं का आवाहन कर जो आहुति प्रदान की जाती है उनसे  वायु प्रदूषण हटाने , वातावरण को दोष रहित बनाने और सम्पूर्ण सौर मंडल को  पवित्र करने का काम किया जाता है |

औषधि शक्ति ---कृमि नाशक  औषधियों में अनेक का वर्णन किया  जाता है वेद में जिन का वर्णन किया गया है वे बहुत है   जिनमे छोटी पीपल ,सुहागा ,फिटकरी ,गुग्गल ,गंधक ,कूट लॉन्ग ,इलाइची ,खैर ,आम पीपल की लकड़ी गूलर  हल्दी दालचीनी अदरक नीम बेल तुलसी गिलोय  सिलाची लाख कपूर पिपरमेंट बच अमलतास का वर्णन  मिलता है इनका प्रयोग असाध्य  बीमारियों को सरलता से ठीक कर सकता  है

निम्नांकित प्रयोग अवश्य करें
  • समय से सोना उठना और दैनिक कार्यों को एक अनुशासन में बांधिए और उनके अनुरूप चलें ध्यान यह रहे कि सूर्योदय  उठना अधिक श्रेष्ठ है 
  •  योग व्यायाम और ध्यान का अभ्यास अवश्य करें इससे ही गति का अभ्यास होगा यदि ध्यान का कोई तरीका नहीं आता हो तो केवल स्वास के आने जाने  को देखो ,आत्म स्थित होने की सहज विधि मिलेगी | 
  • संकल्प  विधि का प्रयोग करें   समय जीवन और उसके उद्देश्यों के लिए कल्याण कारी संकल्प बनाइयें और उनका नित्य प्रति कार्य शैली और पूरा करने का उपक्रम कीजिये | 
  • संकल्प का सीधा सम्बन्ध आपकी आंतरिक ऊर्जा और उसे सकारात्मक प्रयोग में लगाने की योजना की व्यवस्था से है इससे किसी भी स्थिति में जीत हासिल की जासकती है |
  • नित्य की साधना में नांद का बहुत  महत्त्व है, उसके लिए मन्त्रों  प्रयोग करें शंख घंटा ताली आदि का प्रयोग करते रहे उससे सूक्ष्म कृमि नष्ट होने के प्रमाण है | 
  •  चिंतन की सकारात्मकता और उसके विषय और नायक सकारात्मक  होने चाहिए, उनके चिंतन से आपकी क्रिया शीलता में  भी सकारात्मक परिवर्तन आने लगेंगे | 
  • तुलसी मरुआ दोना हर सिंगार ,बेल पीपल नीम  गूलर इनके संपर्क में बना रहना चाहिए इनसे भी अनेक कृमि ख़त्म होते है ,| 
  • सूर्य ,पृथ्वी ,इंद्र वरुण और अगस्त्य अत्रि कण्व  जमदग्नि ऋषियों के  नाम से जल दिया जा सकता हैइनका  आराधना में भी  है | 
  • नित्य के क्रम में हवन  का विशेषः  महत्त्व है इस हवन में बच ,लाख कपूर पीपल गंधक  थोड़ा  लोग गूगल नारियल और खैर आम पीपल की लकड़ी या  गाय के कंडे से अग्नि प्रज्वलित करके हवन करें देव आहुतियों के साथ उपरोक्त ऋषियों की भी आहुति दे 
  • गर्म पानी का प्रयोग फिटकरी एवं सुहागा जला कर उपयोग में लाये ये किसी भी तरह के कृमि के विकास क्रम को ख़त्म कर सकता   है

 

Saturday, April 4, 2020

प्राचीन चिकित्सा और आधुनिक चिकित्सा का समन्वय एवं शोध (Coordination and research of ancient medicine and modern medicine) (कॅरोना महा मारी के सन्दर्भ में )

प्राचीन चिकित्सा और आधुनिक चिकित्सा का समन्वय एवं शोध
(Coordination and research of ancient medicine and modern medicine)
(कॅरोना महा मारी  के सन्दर्भ में )

तवांग कसबे के दूर तक न कोई बस्ती थी न कोई  रहवास था हिमालय के तवांग चू घाटी की अदम्य ऊंचाइयों पर स्थित था यह क़स्बा, थोड़ी आबादी थी और  बुद्ध की  तीर्थ के रूप   जाना जाता था यह  गाँव ,शूमे बाबा नाम था उनका उस क्षेत्र के सबसे बड़े धर्म गुरु थे ,बहुत से  लोगों का न्यायभी कर देते थे और समय पड़ने पर यथोचित मदद  भी करते रहते थे , ख्याति बहुत दूर दूर तक थी ,सबसे पास का  क़स्बा  लग भग २०० किलोमीटर दूर था लोग उनके पास अपनी चिकित्सा के लिए आते रहते थे ,वो कोई पत्ता जड़  छाल मन्त्र और  राख आदि का प्रयोग बात देते थे और आश्चर्य यह कि वो रोगी ठीक हो ही जाता था , समय के साथ कई असाध्य रोगो की सहज चिकित्सा में भी उनका नाम काफी आगे लिया जाने लगा था ,२४ घंटे  बँधा हुआ आराधना क्रम और जन सेवा के लिए सदैव खुले द्वार | 

डॉक्टर  थॉमस अपनी भारत यात्रा पर थे और भ्रमण करते हुए अरुणाचल के सौंदर्य के लिए आये थे, साथ के गाइड ने बताया डॉ साहब हम ३ दिन की यात्रा वहां भी करे डॉ थॉमस को , भारतीय संस्कृति में बड़ी रूचि थी ,वे तैयार हो गये और अपनी पत्नी रोशा  के साथ ३ दिन बाद तवांग  कार्यक्रम भी तय कर दिया, निश्चित दिन दोनो युगल गाइड मिकेल के साथ तवांग घाटी पहुंचे बड़ा व्यस्त कार्यक्रम था बेहद सुंदर घाटी, छोटे छोटे से झोपडी नुमा घर ,ऊँची ऊँची चोटियां और ऐसा नजारा जैसे ईश्वर ने रुक कर ,बड़े इत्मीनान से बनाया हो यह स्थान भगवान् ,बुद्ध की आराधना और एक नाद घाटी में एक अलग तरह का चमत्कार पैदा करता था, डॉ युगल ने अपने ही कमरे में जीसस का ध्यान किया कैंडल जालाया लगा अभूतपूर्व सवेदन शीलता थी उस स्थान में ,लगाजीसस सामने खड़े है मुस्कुरा  रहे है | 

रात ज्यादा हो चुकी थी, अचानक रोशा मेम का फ़ोन आया था, डॉ साहब को सीने में तेज दर्द है ,स्वांस नहीं ले पारहे है, सारी दवाइयाँ  जो हम लाये थी दे दी गई है, होटल मैनेजर ने साफ कह दिया साहब रात  को टैक्सी भी नहीं जा सकती ,डॉ बोल नहीं पा रहे थे, होटल मालिक बोला  अभी चार घंटे है ६ बजने में ,मंदिर में बाबा को दिखाते है कुछ दवा मिल जाए तो ठीक ,कुछ समझ नहीं आया उस समय डॉ साहब को मंदिर लेकर पहुँच गए, बाबा अभी भी पूजा में  बैठे थे ,दरबान ने एक हल्की घंटी बजाई ,डॉ साहब को एक बिस्तर पर लेटाया, अचानक बाबा ने आकर बिना कुछ बोले नब्ज पर हाथ रखा ,आँख  देखी दो शिष्यों को एक तेल दिया हाथ पाव में  मलो ,खुद कही जंगल में ओझल हुए और तत्काल कुछ पत्तियों का रस डॉ के मुँह और नाक  में टपकाया ,अचानक डॉ को लगा की किसी ने वेंटिलेटर की तरह पूरी ऑक्सीजन फेफड़ों में भर दी हो, आंसू बह रहे थे कृतज्ञता के ,दर्द स्वांस की कोई समस्या नहीं थी अब उन्हें ,बाबा डॉ  पर हाथ फरते हुए कोई मंत्र बुद बुदा रहे थे  और डॉ कब सो गए मालूम ही नहीं पड़ा | 

बाबा ने कहा मत उठाइये उन्हें जब  उठे तब उठने देना, डॉ ८ बजे उठे आराधना का स्वर कही  आरहा था ,रोशा पास बैठी थी ,डॉ बाबा को देख कर अचंभित था , डॉ थॉमस ने कहा आई ऍम वेरी मिकेल बीच में ही बोल उठा  आपको थैंक्स कह रहे है , बाबा ने  मिकेल की और देख कर  मुस्कुराया ,नो माय सन गॉड इज  ग्रेट फिर बाबा ने फ़्लूएंट इंग्लिश स्पेनिश में डॉ को समझाया , इट्स ए  बिग कॉर्डियक अटैक, डॉ की कुछ समझ नहीं आरहा था की बाबा क्या है ,बाबा बोलता गया शुगर लेवल २० या ३० होगया था  ,आपने खाना नहीं खाया था ८ घंटे से ,फिर शराब के २-३ [पैग  ले लिए, दवा खाली ,परिणाम आपके सामने है ,आपको आपके जीसस ने बचा लियाजिसकी आपने प्रेयर की थी , डॉ को काटो तो खून नहीं ,बाबाएक गेम के कॉमेंट्रेटर की तरह बोलता जा रहा था और उसने जो कुछ कहा वो सच था ,बाबा ने एक दूध का गिलास दिया टेक इट  डॉ ने बिना किसी भाव के पी लिया, कोई शेक सा था ,बाबा बोले अब आपको शुगर और हार्ट का कोई दिक्कत नहीं होगा ,जब दवा लेना हो तो चेक करना फिर लेना | 

तीसरे दिन खूब घूमे हम शुगर बिलकुल  दवा ले नहीं पाया ,ब्लड प्रेशर बिलकुल नए बच्चे जैसा था ,मेरी कुछ समझ नहीं आरहा था, तो बाबा से  मिलने पहुंचा ,बाबा इस समय मंदिर में ही थे ,ध्यान में हम चुपचाप जाकर बैठ गए थे ,एक अनवरत आराधना की ध्वनि थी मैंने भी आँखे बंद कर ली, और अचानक आँखे खुली तो मैंने खुद को अपने घर के पास वाले चर्च में पाया ,मरियम  स्नेह से ये कह रहीं थी कि , देख यहाँ मैं  बाबा के रूप में हूँ ,व्याकुल होगया था मन ,बाबा हसते  हुए बोले, डॉ थॉमस ५० वर्ष पहले मै भी लन्दन सेअपनी डॉ की डिग्री लेकर आया था, मै भी आपके जैसे दवा  देना जनता था , मगर उसका प्रभाव ,प्रकार कभी नहीं समझ पाया , फिर जब भारत की  शक्ति और औषधियों -नाद चिकित्सा, हवन चिकित्सा और मंत्र चिकित्सा का अम्बार देखा तो लगा ,लन्दन की पढाई अधूरी और अपूर्ण थी, बाबा बोले जो चिकित्सा पद्धति आरम्भ और अंत तक इस वाक्य पर  चलती हो i treat he cures  तो उस ही  रिसर्च करना चाहिए न ,तो लगा हूँ काम मैं ,आपको अब दवा लेने की जरूरत नहीं  है, उस दिन का अटैक के लिए एक ई सी जी जरूर करा लेना, मैंने जो उस रात दवा दी है वो पर्याप्त थी,   बाबा ने सि र पर हाथ रख कर गले से चिपकाया ,फिर बोले मुझे देर हुआ,  भगवान अच्छे से रखें ,दूर जाता हुआ ,फिर एकाग्र आँख बंद करके बाबा कहीं दूर निकल गए थे ,मैंने प्रण  किया अब मैं  भी इस अधूरी पढ़ाई को पूरा करके सफल ही  बनूँगा | 

हम आज अपने थोड़े से ज्ञान के आधार पर अपने आपको  महा  योद्धा समझ  बैठते है ,और बहुत से बिखरे पड़े  ज्ञान का शोध करने से से बचते रहते है ,परिणाम यह कि शायद उतने उन्नत नहीं होपाये ,जितना हमें होना चाहिए ,सुश्रुत की शल्य क्रिया, जौंक प्रयोग से अनेक व्याधियों का इलाज ,बुखार के अनेक प्रकारों का  और उनके अनुसार निदान 
भूत  ज्वर, प्रेत ज्वर पिशाच ज्वर ,रत्रिज्वर शीत  ज्वर सन्न पात ज्वर बल ज्वर गृह ज्वर कुमार ज्वर तप ज्वर ब्रह्म ज्वर विष्णुज्वर महेश ज्वर 
अब इन १४ प्रकार  चिकित्सा एकविधि और दवा कैसे हो सकती है ,वनोपयोगी औषधियों के प्रयोग से अनेक रोगो का शमन देखा गया है ,इसी प्रकार दीपोत्स्व ,होलिका दहन और सभी धर्म  के तीज त्योहारों की मान्यताएं भी वैज्ञानिक आधारों  पर खड़ी होगी यह भी शोध का विषय है ,जिसे सहजता में नकार देना अपने ज्ञान की कमी को दर्शाता है | 
हवन चिकित्सा में मन्त्रों के एक नियत नांद का , औषधियों का अग्नि में आहूत करना और उससे उठे अग्नि  धुऐ से वातावरण के प्रोटोन्स में  सकारात्मक अंतर  ये सभी शोध का विषय है ,साथ ही दीप  दान पुष्प दान औषधियों के उबटन भी शोध का विषय है | 


कॅरोना महा मारी के सन्दर्भ में अथर्ववेद के दूसरे और पांचवे अध्याय में कम से कम ३० श्लोक लिखे है जो वायरस बेक्टेरिया के प्रकार और कैसे वो मनुष्यों को हानि पहुंचाते है और उनका औषधीय वर्णन में उनके शमन की विधियां, क्या है क्या उन्हे हटाया जा सकता है, क्या उनका शमन मन्त्रों और हवन औषधियों से संभव है ,ये सब विषय वस्तु अध्ययन का विषय है ,वेद की व्यवस्था में मन्त्र शक्ति के द्वारा रोग शमन की बात भी कही गई है, अनेक चिकित्सा पद्धतियों में शल्य कर्म ,नेति, धौति ,मौली, प्राणायाम ,योग ,बस्ती ऐसे क्रियाएं है, जिनसे बड़े से बड़े असाध्य रोग हटाए जा सकते है, ये सब आधुनिक विज्ञान के लिए शोध का विषय रहेगा | 


हमारे कर्त्तव्य और दृष्टिकोण में निम्नांकित बिंदुओं को ध्यान रखना अति आवश्यक है 

  • भारतीय सांस्कृतिक एवं धार्मिक अनुसंधानों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए और समय  बद्ध अध्ययन और उसकी सफलता पर विचार करना आवश्यक है 
  • आयुर्वेद यूनानी होम्योपैथी  कलर थिरैपी मैग्नेटिक थिरेपी मन्त्र थिरेपी का गहन अध्ययन आवश्यक है 
  • जिस देश समय परस्तिथियों और वातावरण में हम लोग रह रहे है ,उसके अनुरूप ,खान पान और नियम संयम  का पालन किया जाए 
  • हवन में  ओषधियों के प्रभाव ,बेक्टेरिया वायरस के सक्रमण को कैसे ख़त्म करते है ,इसका शोध किया जाना आवश्यक है 
  •  मन्त्र शक्तियों में नांद के  एक लय ,एक स्वर में ,आवृति के प्रभाव से रोगो की चिकित्सा किस तरह प्रभावी है, यह शोध आवश्यक है 
  • जिन मूल औषधियों के उद्गम स्थल जो स्थान बताया जाता है ,उनके रोग भी उसी देश में पाए जाते है अतैव जिस देश से  रोग पैदा हुआ हो ,उसके आस पास के वनस्पतीय पौधे ,दवा के लिए शोध का विषय हो सकते है 
  • आहार विहार साथ ही औषधीय गुणों के साथ पथ्य और निषेध वस्तुओं का ध्यान रखना भी आवश्यक है 
  • समस्त  चिकित्सा पद्धतियों को सहज बनाया जाए रोगो की सुरक्षित जीवाणु स्लाइड बना कर, बाजार में उपलब्ध कराई जाए जिस पर हरेक पैथी का इंसान शोध कर सके 
  • दीप दान प्रभाव औषधियों का नक्षत्र के हिसाब से तोडा जाना, प्रयोग किया जाना और उसके चमत्कारिक प्रभाव का आंकलन अति महत्व पूर्ण है 
  • हमेशा हर परामर्श के लिए खुला प्रस्ताव बनाया जाना चाहिए ,यह १००% सत्य है कि आपके सफल होने की संभावनाएं और ज्यादा प्रबल हो जाएंगी





 




 




Tuesday, March 24, 2020

आदर्शों में कठोर अनुशासन आवश्यक है (कॅरोना Strict discipline is required in ideals(carona )

आदर्शों में कठोर अनुशासन आवश्यक है (कॅरोना
Strict discipline is required in ideals(carona )

पिता जगत बेहोशी से जागी अपनीबेटी अदिति को चिल्ला चिल्ला कर कह रहा था ,अदिति तुम  उसी कमरे में रहो ,देखो ३ कमरे के  मकान में से एक कमरा तुम्हे इस लिए दिया है कि  घर के और लोग इससे प्रभावित न हो जाए ,तुमसे बार बार कहता था घर बैठो, घर बैठो तुम रोज नए बहाने बनाकर बाहर जाती रही,फिर उस दिन एक रेस्त्रा में बेहोश मिली तुम्हारे दोस्त और घरवाले सब इकट्ठे थे ,अस्पताल में भारी भीड़ थी ,तुम्हारे साथ तुम्हारा चाइना से आया हुआ दोस्त भी था | डॉ ने तुरंत हालात समझ के  कह दिया ये कॅरोना पोजेटिव है फिर उस रेस्त्रा  के १२ लोग पोजेटिव निकले डॉ से कहा  गरीब आदमी हूँ ,बड़े अस्पताल चाहते न चाहते बड़ी रकम मांगते है ,मैं  एक साधारण सिपाही कहाँ से करूँ पूर्ती ,३ बच्चे और है फूट फूट कर  रो रहा था पिता शायद अपनी मज़बूरी ,बेटी का बार बार झूठ बोलना और परिवार की चिंता ने उसे हिला कर रख दिया था ,डॉ ने उसकी चुप्पी तोड़ते हुए कहा दीवान जी अपनी बेटी को लेजाओ ये दवाये देना हमपर इससे ज्यादा कोई सुविधा है नहीं १५ दिन इसे अलग रखना डॉ घर आकर देखेगा इसे ,यदि इसका उललंघन हुआ तो आप तो जानते हो न कानून | 




एक व्यस्त तम चौराहे पर ड्यूटी लगी थी जगत की ,पूरी  रात बेटी के पास बैठ कर गुजारी थी ,स्वांस नहीं आ रही थी ,दादी का नुख्सा बनाया, लॉग  कालीमिर्च पीपल अदरक का काढ़ा बनाया २-३ बार दिया नाक  में तेल लगाया डॉ की दवा खाई थोड़ा आराम मिला, डॉ यही कहता था कि   देशी चीजे सब फालतू है देना मत देना ,मगर मैं तो बाप हूँ न आधी आधी  स्वांस में तड़पती उस लड़की की यातना में उसे सब कुछ देकर भी एक साँस देने का प्रयत्न कररहा था | कहाँ सो पाया रात भर फिर चौराहे पर ड्यूटी में आगया ,अचानक तेजी से आती हुई बाइक को बेरियर पर रुकते हुए देख  हम वहां मुड़े ,एक हम उम्र लड़की चिपकी सी बैठी थी एक लड़के से ,बोली अंकल माँ की तबियत ख़राब है,अपनी लड़की सी झूठ बोलती दिखी थी ,वो, लड़का कुछ शक्ल से ही आवारा टाइप का दिख रहा था, मैंने पूछा आई कार्ड है कोई ,लड़की ने झपट कर एक बदनाम सी यूनिवर्सिटी का आई कार्ड दिया, अचानक मैंने लड़की के फ़ोन पर आता फ़ोन जिसपर माँ लिखा था लपका ,पूछा  है कौन है वहां से गुस्से में आवाज आई कहाँ है तू ,फिर अचानक बोली आप कौन मैंने पूछा  आप कौन  बोल रही है ,महिला बोली इसकी माँ आप कौन ?निरुत्तर मैं पागलों की तरह उस लड़के पर डंडे बरसाने लगा और वो दोनो तुरंत वहां  से पीछे लौट कर भाग गए बड़ी देर सोचता  इतना गुस्सा ठीक था क्या मेरा | 




उस दिन पूरी दुनियां मुझे झूठी ही   मिली, कोई कह रहा था तबियत ख़राब है ,कोई कह रहा था डेथ हुआ है ,कोई कह रहा था भाई फंस गया है,  पैदल कैसे आएगा ,महिला कह रही थी बच्चे रह गए है और तरह तरह के बहाने सुन कर यही लगा दुनियां कहाँ  जा रही है , मैं क्या बताता की पिछले दिनों में कितना रोया हूँ ,पर क्या करूँ मैं कैसे रोकूं इन सबको मौत के मुँह में जाने से ,कितना मजबूर बे सहारा और यातना में भरी लग रही थी दुनिया ,ऐसा लग रहा था कि घूमने फिरने की स्वतंत्रता देकर मैं  उन्हें एक अंधे कुँए में धकेल रहा हूँ और उसपर क़ानून यह कि  आपने उसे मारा क्यों ,क्या बताता अपनी प्राण छोड़ती बेटी का दर्द, जिसमे मैं एक दर्शक बना बदहवासी में भाग कर उसकी तरफ जाता वो जोर से चिल्लाती मास्क पहनो, बरसाती पहनो ,फिर आओ  ,निढाल सा वही करता जो वो कह रही होती थी अब सामर्थ्य  कहाँ था जो उसकी नहीं सुनता| 



  बाबा साँस नहीं आरही, गला बंद होगया है ,आखों में जलन है ,दवा तो जो देसकता था दी ,तमाम झाड़ फूँक कर डाली और ईश्वर से प्रार्थना करने लगा हे परम पिता बच्चे को ठीक कर और कराहते कराहते वो सो गई,मेरी थोड़ी नींद लगी ही थी कि २० वर्ष पुरानी स्मृति घूमने लगी सर जोज़ेफ एवं उनका   परिवार आजादी के बाद यही किसी कंपनी काम करता रह गया था , मुझे उनके बंगले पर ही ड्यूटी मिली थी ,काफी संभ्रांत थे मियां बीबी, खाने का और तीज त्योहार सब याद  रखते थे ,एक दिन अचानक यह कहने लगे जगत तुम जानता है कि दुनियां में इससे अच्छा कोई देश नहीं है, शांति है ,सुख यहीं है, मैंने  कहा मालिक हम सब तो गरीब है ,बहुत समस्याएं है ,वो बोले जगत यहाँ अचानक देश को आज़ादी मिल गई है और आप सोचो किसी जन्मते छोटे तोते के बच्चे को पकड़ लाये फिर उसे धीरे धीरे बड़ा किया फिर एक दिन डंडा लेकर उसे उड़ाने  की कोशिश की वह लहूलुहान होगया, उसने उड़ना सीखा ही नहीं ,था उसे कोई अनुशासन का ज्ञान ही नहीं था, तो  उसकी यही गति होनी ही थी | 


अनुशासन के बैगैर मनुष्य क्या जड़ चेतन सब हिंसक पशु जैसा हो जाता है वह अपना पराया भूल कर केवल हत्यारा सिद्ध कर डालता है स्वयं को , राष्ट्र प्रेम -दायित्व कर्त्तव्य तो संभ्रांत व्यक्तियों के लिए उचित है मगर जो अपने ही हितों को नष्ट करे ,जिससे समाज का जीवन खतरे में पड़  जाए ,ऐसा व्यक्ति केवल दंड का भागी दार होता है  

,इतिहास गवाह है नियत स्वार्थों के लिए, परिवार अपनों और राज्यों का भयानक नर सहांर भरा पड़ा है ,मोहोम्मद गौरी को पृथ्वी राज की उदारवादिता के कारण ही बलिदान होना पड़ा , यदि कड़े अनुशासन में होते तो शायद देश का इतिहास अलग होता ,ओरंजेब ने दारा शिकोह का कटा सर देखा और बहुत देर रोया था ,वो यह कहते हुए कि भाई इसके आलावा कोई मार्ग था ही नहीं था ,यही अनुशासन है मेरा, मै भी बह रहा था स्वप्न संसार में बिटिया रो रही थी बाबा आपके प्यार ने बचा लिया मुझे आज १५ दिन हो गए है अब मैं ठीक हूँ 


निम्नांकित का विशेष ध्यान रखे  

  • राज्य और देश अपने नागरिकों से एक ही अपेक्षा रखता है की उसका नागरिक अपने मानव कल्याण के दायित्व के बदले उसका सहयोग करे उसके अनुशासन का पालन करे | 

  • नीति निर्देशक तत्वों में नागरिक की एक आदर्श आचरण सहित लिखी है जो राज्य और नागरिक दोनो को निर्देशित करती है 

  • स्वयं के हितों से बड़ा है सामाजिक हित और समय समय पर लोगोने कुर्बानी देकर अपने हितों और बलिदान करते हुए दूसरों के हितों की रक्षा की है 

  • अनुशासन का कठोर पालन ही किसी राष्ट्र को मजबूत और सुसंस्कृत बना सकता है क्योकि व्यक्ति में आलोचना करने का जो सुख हैं वही विवाद और स्वार्थों का कारक  बनता है

  • महत्वाकांक्षाओं से उत्त्पन्न होता है लोभ और लोभ से पाप पाप से नकारात्मकताओं के समूह फिर व्यक्ति का गिरना  तय ही है 

  • अनुशासन के मार्ग में अपने पराये बड़े छोटे जो आये उनपर एक ही विधि प्रयोगित हो क्योकि इसके बिना राष्ट्र का विकास हो ही नहीं सकता 

  • जो लोग हर समय नाकारात्मक ऊर्जा का उत्सर्ग करते हो उनका सख्ती से इलाज आवश्यक है दुनियां केवल सकारात्मक मानदंड याद रखती है किस दुष्ट का सर काटा गया यह मायने नहीं रखता 

  • युवा की अमोघ शक्ति केवल अनुशासन में निहित है यहीं से वह स्वयं से समाज तक की कल्पना कर  सकता है अन्यथा वह लक्ष्य रहित अपनी ऊर्जा व्यर्थ  गँवा देगा| 

  • गुरु के आचरण और उनकी जीवन शैली से ,अनुशासन सीखने वाले सफल होते है ,जबकि अनुशासन हीनता से मनुष्य की पीढ़ियां कलंकित होकर अपना अस्तित्व नष्ट कर देती है |







 


आदर्शों पर अमल आवश्यक है



rivival of youth power
युवा शक्ति का पुनुरुत्थान


 

अनंत कामनाएँ,जीवन और सिद्धि

  अनंत कामनाएँ,जीवन और सिद्धि  सत्यव्रत के राज्य की सर्वत्र शांति और सौहार्द और ख़ुशहाली थी बस एक ही  कमी थी कि संतान नहीं होना उसके लिए ब...